अस्कोट की ऐतिहासिक रामलीला का 153वें वर्ष मे प्रवेश-
अस्कोट : महेश पाल
अस्कोट की ऐतिहासिक रामलीला मंचन इस बार 153वें वर्ष मे प्रवेश कर चुकी है।अस्कोट पाल राजवंश के राजा पुष्कर पाल ने सन् 1868 ई. को करवाया था पहली बार मंचन की शुरुवात की थी।
उस समय रामलीला मंचन लकड़ी के छिलकों की रोशनी मे करायी जाती थी।रामलीला मंचन देखने दूर दराज से आये दर्शको के लिऐ राजपरिवार रैनागैर मैदान मे टैंट लगा कर रहने व खाने की ब्यवस्था की जाती थी।
छिलको की रोशनी से एलईडी लाईट तक के अद्भुत सफर का प्रतीक है अस्कोट की रामलीला मंचन का मंच।1894 मे राजपरिवार द्वारा इंग्लैंड से लालटेन मंगवाकर मंच मे रोशनी की ब्वस्था शुरु की थी फिर वक्त के साथ लाईट का चलन बड़ा।उस समय अल्मोड़ा,बरेली से ब्यापारी पहुंचते।
कुंवर भानुराज और उनके पुत्र युवराज महिराज पाल ने किया इस बार मंचन का शुभारम्भ किया।पहले दिन नटी सूत्रधार और देवराज ईन्द्र के दरबार का मंचन दिखाया गया। आज होगा राम जन्म का मंचन।
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संपादक – फास्ट न्यूज़ उत्तराखण्ड
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