कुदरत का अनोखा करिश्मा : एक साल की बच्ची के शरीर में थीं कई दुर्लभ विकृतियां -डॉक्टरों ने जटिल सर्जरी से दी नई जिंदगी

खबर शेयर करें 👉

हरियाणा के फरीदाबाद में चिकित्सा विज्ञान का एक अद्भुत उदाहरण सामने आया है। यहां एक निजी अस्पताल के डॉक्टरों ने एक साल की बच्ची की ऐसी दुर्लभ और जटिल जन्मजात बीमारी का सफल इलाज किया है, जिसे मेडिकल जगत के सबसे चुनौतीपूर्ण मामलों में गिना जाता है। बच्ची के शरीर में जन्म से ही मल और पेशाब के लिए केवल एक ही बाहरी रास्ता था। इतना ही नहीं, उसके शरीर में दो गर्भाशय, दो अलग-अलग योनियां और बड़ी आंत से जुड़ी गंभीर विकृति भी मौजूद थी।

डॉक्टरों के मुताबिक बच्ची ‘कॉमन क्लोआका’ नामक दुर्लभ जन्मजात बीमारी से पीड़ित थी। इस स्थिति में मूत्र मार्ग, प्रजनन तंत्र और आंत अलग-अलग विकसित होने के बजाय एक ही मार्ग में मिल जाते हैं। यह बीमारी लगभग 50 हजार नवजात बच्चियों में से किसी एक में पाई जाती है।

फ़ास्ट न्यूज़ 👉  उत्तराखंड...भूमि और कॉटेज के नाम पर 1.56 करोड़ की कथित ठगी --सात नामजद समेत कई पर मुकदमा दर्ज

मामले को और जटिल बनाने वाली बात यह थी कि बच्ची में दो गर्भाशय, दो योनियां और टाइप-1 ‘कंजेनिटल पाउच कोलन’ जैसी दुर्लभ विकृतियां भी एक साथ मौजूद थीं। विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी असामान्य स्थितियों का एक ही मरीज में पाया जाना बेहद दुर्लभ है।

फ़ास्ट न्यूज़ 👉  उत्तराखंड...पंखे में उतरे करंट से आठवीं के छात्र की मौत, परिवार में मचा कोहराम

जन्म के तुरंत बाद बच्ची की जान बचाने के लिए आपातकालीन सर्जरी की गई थी। बाद में उसे बेहतर इलाज के लिए फरीदाबाद के अमृता अस्पताल लाया गया। यहां विशेषज्ञों ने एमआरआई और अत्याधुनिक एंडोस्कोपिक जांचों के माध्यम से उसकी आंतरिक संरचना का गहन अध्ययन किया और ऑपरेशन की विस्तृत योजना तैयार की।

घंटों चली जटिल सर्जरी के दौरान डॉक्टरों ने नया गुदा मार्ग बनाया, पेशाब के लिए अलग रास्ता तैयार किया और शरीर की विभिन्न प्रणालियों को सुरक्षित रूप से अलग-अलग प्राकृतिक मार्ग प्रदान किए। सर्जरी के बाद बच्ची की स्थिति सामान्य है और उसके स्वस्थ जीवन की उम्मीद बढ़ गई है।

फ़ास्ट न्यूज़ 👉  उत्तराखंड...तीनपानी बाईपास पर अब नहीं चलेगी लापरवाही --रॉन्ग साइड चलने वालों पर होगी बीएनएस की धारा 281 में कार्रवाई

डॉ. नितिन जैन ने बताया कि यह उनके करियर के सबसे चुनौतीपूर्ण मामलों में से एक था। वहीं डॉ. ऋधिमा भाटिया ने कहा कि इतनी कम उम्र के बच्चे की लंबी सर्जरी के दौरान हर पल विशेष निगरानी की आवश्यकता होती है, जिसे टीम ने सफलतापूर्वक निभाया।

इस सफल ऑपरेशन ने न केवल बच्ची को नई जिंदगी दी है, बल्कि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान की क्षमताओं को भी एक बार फिर साबित कर दिया है।

ADVERTISEMENTS

Ad Ad
सबसे पहले ख़बरें पाने के लिए -

👉 फ़ास्ट न्यूज़ के WhatsApp ग्रुप से जुड़ें

👉 फ़ास्ट न्यूज़ के फ़ेसबुक पेज़ को लाइक करें

👉 कृपया नवीनतम समाचारों से अवगत कराएं WhatsApp 9412034119