रानीखेत विधानसभा से भाजपा/काँग्रेस ने नहीं दिया किसी महिला को मौका-
एस आर चंद्रा
महिला को टिकट देने से ही होता है, महिला संसक्तिकरण का विकास।
भिकियासैंण। महिला सशक्तिकरण और महिला सम्मान की बात करने वाली सभी पार्टियां जब विधानसभा चुनाव में 30 प्रतिशत महिलाओं को भी टिकट नहीं दे पाती है तो इनके झूठे महिला सशक्तिकरण के नारे को भी समझा जा सकता है ।
जब तक 50% क्षमता के साथ विधानसभा मैं नहीं पहुंचती तब तक यह नहीं कहा जा सकता कि वे सशक्त हैं ।विधानसभा पटल पर जब महिलाओं को अपनी बात रखने का मौका मिलेगा तो स्वाभाविक है कि महिला हितों से जुड़े अनेक पहलुओं पर चर्चा करेगी और नीतियां बनाने में निर्णायक सिद्ध होगी।
महिला सशक्तिकरण की बड़ी बड़ी बातें अपने मंचों से करने वाली भाजपा में भी टिकट महिलाओं को दिए जाने की चर्चा पर कोई खासा ध्यान नहीं दिया जाता है।
बात रानीखेत विधानसभा की ही कि जाए तो 5वां विधानसभा चुनाव सामने हैं लेकिन सूत्रों की मानें तो किसी भी महिला का नाम रानीखेत सीट से प्रबलता से नहीं दिया गया है और ना ही पार्टी यहाँ से किसी भी महिला को टिकट देने के लिए संकेत दे रही है,हालांकि अंतिम क्षणों तक भारतीय जनता पार्टी में क्या होता है कोई नहीं जानता।रानीखेत विधानसभा से महिला उम्मीदवारों के रूप में भाजपा से प्रमुख नाम राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष ज्योति साह मिश्रा, और केंद्रीय मंत्री अजय भट्ट की धर्मपत्नी पुष्पा भट्ट, और रेनू अधिकारी,बिमला रावत थे।ज्योति साह मिश्रा पिछले डेढ़ वर्षों से रानीखेत क्षेत्र में सक्रिय हैं और लगातार जनसंवाद कर ग्रामीणों और महिलाओं के हितों में कार्य कर रही है।यदि भाजपा ने महिलाओं को रानीखैत विधान सभा से उम्मीदवार बनाया तो निश्चित ही भाजपा की अन्दुरुनी खीततान समाप्त हो जायेगी, आऔर महिला को सम्मान मिल जायेगा। लेकिन भारतीय जनता पार्टी महिला को इस सीट पर मौका देती है या नहीं यह तो आने वाला समय ही बताएगा ।
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