जंगल बचेगा तो बचेगा जीवन : दन्या पॉलिटेक्निक में ‘ओण दिवस’ पर छात्रों ने लिया वनों को बचाने का संकल्प
दन्या (अल्मोड़ा): राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थान, दन्या में बुधवार को ‘ओण दिवस’ के अवसर पर पर्यावरण संरक्षण की गूंज सुनाई दी। संस्थान परिसर में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं को प्रकृति के प्रति उनकी जिम्मेदारी का अहसास कराते हुए वनों की सुरक्षा के लिए जागरूक किया गया।
वनाग्नि के खिलाफ छेड़ी मुहिम
कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने वनों में लगने वाली आग (वनाग्नि) को उत्तराखंड की संपदा के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया। छात्रों को जानकारी दी गई कि कैसे आग लगने से न केवल बेशकीमती प्राकृतिक संसाधन जलकर खाक हो जाते हैं, बल्कि वन्य जीवों का अस्तित्व भी संकट में पड़ जाता है।
कार्यक्रम के मुख्य बिंदु:
- बचाव के उपाय: जंगलों को आग से बचाने की तकनीक और त्वरित सूचना तंत्र पर चर्चा।
- जैव विविधता: जंगली जानवरों की सुरक्षा और पर्यावरण संतुलन का महत्व।
- दुष्प्रभाव: आग से मिट्टी की उर्वरता और जल स्रोतों पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव।
“सक्रिय प्रहरी बनें छात्र”: जगत सिंह करायत
कार्यक्रम अधिकारी श्री जगत सिंह करायत ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि युवा शक्ति ही जंगलों को आग से बचाने में सबसे बड़ी भूमिका निभा सकती है। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे अपने गांवों और आसपास के क्षेत्रों में लोगों को जागरूक करें ताकि वनों को जलने से बचाया जा सके।
छात्रों का संकल्प: “जंगल बचाओ–जीवन बचाओ” के नारों के साथ छात्रों ने शपथ ली कि वे न केवल जंगलों को आग से बचाएंगे, बल्कि जैव विविधता के संरक्षण में भी सक्रिय योगदान देंगे।
इस दौरान संस्थान के प्रधानाचार्य सहित समस्त स्टाफ और छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। पूरे कार्यक्रम का उद्देश्य नई पीढ़ी को पर्यावरण प्रहरी के रूप में तैयार करना रहा।
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संपादक – फास्ट न्यूज़ उत्तराखण्ड
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