लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम में संशोधन होना चाहिए : डॉ उपाध्याय
किच्छा/रूद्रपुर। पूर्व दर्जा राज्यमंत्री एवं प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता डॉ० गणेश उपाध्याय ने पूर्व विधायक आजम खां को सेशन कोर्ट द्वारा निर्दोष साबित होने व बरी होने पर प्रेस को जारी एक बयान में कहा है कि जनप्रतिनिधित्व कानून के प्रावधानों में जिस प्रकार राज्यपाल या विधानसभा अध्यक्ष की ओर से विधायक की सदस्यता रद्द करने पर संबंधित विधायक को अपील के लिए चार महीने का समय देने का प्रावधान है। उसी तरह आपराधिक मामले में सजा होने पर भी अपील स्वीकार होने तक सदस्यता रद्द नहीं करने का प्रावधान लागू करना चाहिए।
लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम में संशोधन होना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत ही आजम को दो वर्ष की सजा होते ही उनकी सदस्यता रद्द हुई थी। लेकिन यह पहला मामला है जब अपील में कोई विधायक बरी हुए हैं। ऐसे में सर्वोच्च न्यायालय को ही अपील स्वीकार होने तक सदस्यता रद्द नहीं करने का प्रावधान लागू करना चाहिए। उनका कहना है कि भविष्य में इस तरह के मामलों के लिए अब लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम में संशोधन होना चाहिए। इसमें संबंधित विधायक को अपील के लिए एक निर्धारित समय अवधि मिले, अपील के निस्तारण की भी समयसीमा तय होनी चाहिए।उन्होंने कहा कि आजम खां के निर्दोष साबित होने से पता चलता है कि सजा होते ही अपील का मौका दिए बिना संसद या विधानसभा की सदस्यता खत्म करने के फैसले का राजनीतिक विरोधी दुरुपयोग कर रहे हैं।
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संपादक – फास्ट न्यूज़ उत्तराखण्ड
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