आज हिंदी खुश है कि हिंदी के चर्चे हैं…
हिंदी दिवस पर विशेष प्रस्तुति कविता
आज हिंदी खुश है कि हिंदी के चर्चे हैं,
हिंदी का बखान करते, हिंदी में पर्चे हैं।
भाषा मात्र नहीं है हिंदी, यह अपनी पहचान है,
ऋषियों की संस्कृत भाषा से, इसमें इतनी शान है।
सरल, सहज, प्रभावी भाषा, इस पर हमको नाज़ है,
सात सुरों की महफ़िल में यह, एक सुरीला साज़ है।
गाँव-शहर, देश-प्रदेश को एक सूत्र से बाँधा है,
अपनी मधुर वाणी से इसने, सारे जग को साधा है।
कबीरदास के दोहों में और तुलसी की चौपाई में,
हिंदी की कहानी बसती, ख़य्याम की रुबाई में।
संसद के गलियारे हों या, विश्व-जगत के बड़े पटल,
हिंदी ने मन सबका मोहा, छोड़ी छाप अमिट-अटल।
हम सबकी जिम्मेदारी अब है, इसे सुशोभित करते जाएँ,
हिंदी का प्रचार-प्रसार कर, विकास ‘हिंद’ का करते जाएँ।
जी. एस. कार्की
हल्द्वानी
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संपादक – फास्ट न्यूज़ उत्तराखण्ड
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