उत्तराखंड…डिजिटल हाउस अरेस्ट का डर दिखाकर 8.80 लाख ठगे –हरियाणा से साइबर ठग गिरफ्तार

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अल्मोड़ा। डिजिटल हाउस अरेस्ट के नाम पर एक व्यक्ति से 8.80 लाख रुपये की साइबर ठगी करने वाले गिरोह के एक सदस्य को अल्मोड़ा पुलिस ने हरियाणा के सिरसा जिले से गिरफ्तार किया है। तकनीकी विश्लेषण, बैंक खातों की जांच और लगातार सर्विलांस के आधार पर पुलिस आरोपित तक पहुंची। मामले में शामिल अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।

भतरौजखान थाना क्षेत्र के ग्राम धारड़ निवासी जीवन सिंह रावत ने साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी कि अज्ञात लोगों ने खुद को एटीएस पुणे और अन्य जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर आतंकवाद से जुड़े फर्जी मामले में नाम आने का भय दिखाया। आरोपियों ने फर्जी दस्तावेज और कथित कोर्ट आदेश भेजकर उन्हें वीडियो कॉल के जरिए लगातार निगरानी में रखा और किसी से भी बात न करने की हिदायत दी। इस तरह उन्हें मानसिक दबाव में रखकर तथाकथित “डिजिटल हाउस अरेस्ट” में रखा गया।

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आरोपियों ने पीड़ित से गूगल पे पर खाता बनवाया, अपनी ई-मेल आईडी लॉगिन कराई और वीडियो कॉल के माध्यम से एसबीआई व यूनियन बैंक के खातों का संचालन कराया। इसके बाद 18 से 31 मार्च 2026 के बीच जांच के नाम पर नौ अलग-अलग ट्रांजैक्शनों में कुल 8.80 लाख रुपये अपने खातों में ट्रांसफर करा लिए।

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शिकायत मिलने पर थाना भतरौजखान में भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। विवेचना के दौरान साइबर और सर्विलांस टीम ने डिजिटल साक्ष्यों, मोबाइल नंबरों और बैंक खातों की कड़ियां जोड़ते हुए आरोपित की पहचान रंजोत सिंह पुत्र दर्शन सिंह निवासी जगमालवाली, थाना कालांवाली, जिला सिरसा (हरियाणा) के रूप में की। इसके बाद पुलिस टीम ने 22 जुलाई को हरियाणा पहुंचकर उसे उसके घर से गिरफ्तार कर लिया।

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गिरफ्तारी करने वाली टीम में उपनिरीक्षक संजय जोशी, हेड कांस्टेबल राजाराम और कांस्टेबल प्रकाश सिंह शामिल रहे।

एसएसपी चंद्रशेखर घोड़के की अपील:
एसएसपी ने कहा कि “डिजिटल अरेस्ट” जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं होती। यदि कोई व्यक्ति पुलिस, सीबीआई, ईडी या किसी अन्य एजेंसी का अधिकारी बनकर फोन या वीडियो कॉल पर डराते हुए पैसे मांगता है, तो उसकी बातों में न आएं और तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी पुलिस से संपर्क करें।

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