उत्तराखंड…72 घंटे में 30 से ज्यादा जहरीले सांपों का रेस्क्यू –18 फीट का अजगर और ‘साइलेंट किलर’ करैत ने बढ़ाई दहशत
रामनगर। विश्व प्रसिद्ध कॉर्बेट नेशनल पार्क के प्रवेश द्वार रामनगर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में पिछले 72 घंटों के दौरान 30 से अधिक जहरीले और विशालकाय सांप निकलने से लोगों में भय का माहौल बन गया है। लगातार हुई बारिश के कारण सांपों के प्राकृतिक बिलों में पानी भर गया, जिससे वे भोजन और सुरक्षित ठिकाने की तलाश में रिहायशी इलाकों की ओर आने लगे।
स्नेक रेस्क्यू विशेषज्ञ चंदन कश्यप, अर्जुन कश्यप और ‘सेव द स्नेक सोसाइटी’ के अध्यक्ष चंद्र सेन कश्यप की टीम ने लगातार अभियान चलाकर 30 से अधिक सांपों का सुरक्षित रेस्क्यू किया और उन्हें जंगल में छोड़ दिया।
18 फीट का अजगर बना आकर्षण का केंद्र
रेस्क्यू अभियान के दौरान सबसे चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन करीब 18 फीट लंबे बर्मीज अजगर को पकड़ने का रहा। यह विशालकाय अजगर एक ग्रामीण के घर के बेहद करीब पहुंच गया था। विशेषज्ञों ने जोखिम उठाकर उसे सुरक्षित पकड़ा और उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया।
इसके अलावा टीम ने आठ से अधिक स्पेक्टेकल्ड कोबरा (नाजा प्रजाति) का भी रेस्क्यू किया। इनके फन पर चश्मे जैसी आकृति होती है। साथ ही अत्यंत जहरीले रसेल वाइपर को भी सुरक्षित पकड़ा गया, जिसे कई लोग गलती से अजगर समझ बैठते हैं।
‘साइलेंट किलर’ करैत से सबसे ज्यादा खतरा
रेस्क्यू विशेषज्ञों ने मानसून में कॉमन करैत को सबसे खतरनाक बताया है। उनके अनुसार यह सांप रात में अधिक सक्रिय रहता है और जमीन पर सो रहे लोगों को डस सकता है। करैत के काटने पर दर्द बेहद कम महसूस होता है, इसलिए कई बार पीड़ित को पता ही नहीं चलता और समय पर उपचार न मिलने पर जान का खतरा बढ़ जाता है।
विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि रात में मच्छरदानी का प्रयोग करें, घर के आसपास झाड़ियां और कबाड़ साफ रखें तथा जमीन पर सोने से बचें।
वन विभाग ने जारी की अपील
तराई पश्चिमी वन प्रभाग के वन दरोगा वीरेंद्र पांडे ने बताया कि मानसून के दौरान सांपों की सक्रियता बढ़ना सामान्य है। वन विभाग और प्रशिक्षित स्नेक कैचर की टीमें 24 घंटे अलर्ट पर हैं और अब तक दो दर्जन से अधिक खतरनाक सांपों को सुरक्षित जंगल में छोड़ा जा चुका है।
वन विभाग और ‘सेव द स्नेक सोसाइटी’ ने लोगों से अपील की है कि सांप दिखने पर उसे मारने की कोशिश न करें। तुरंत वन विभाग की हेल्पलाइन या स्थानीय स्नेक रेस्क्यू टीम को सूचना दें, ताकि सुरक्षित तरीके से उसका रेस्क्यू किया जा सके।
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