फिल्म ‘आदिपुरुष’ के प्रसारण पर रोक की मांग : पत्रकार गोपाल डी आर्यन ने एमआयबी और बीसीसीसी को भेजा लीगल नोटिस

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(विशेष संवाददाता)
मुंबई: महाकाव्य रामायण के पौराणिक संदर्भों, सांस्कृतिक मर्यादा और पूज्य देवी-देवताओं के आपत्तिजनक चित्रण को लेकर विवादों में रही फिल्म ‘आदिपुरुष’ का मामला एक बार फिर तूल पकड़ गया है। फिल्म के टीवी सेटेलाइट और डिजिटल (ओटीटी) माध्यमों पर निरंतर प्रसारण को रोकने के लिए वरिष्ठ पत्रकार गोपाल डी आर्यन ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (एमआयबी), ब्रॉडकास्टिंग कंटेंट कंप्लेंट्स काउंसिल (बीसीसीसी) सहित फिल्म के निर्माताओं, निर्देशकों और सेंसर बोर्ड (सीबीऐफसी) को औपचारिक विधिक नोटिस भेजा है।


डबिंग बदलाव के बावजूद भाषा का लहजा और टोन वही
शिकायत पत्र और भेजे गए विधिक नोटिस में यह मुख्य रूप से रेखांकित किया गया है कि यद्यपि भारी जनआक्रोश के बाद निर्माताओं ने फिल्म के कुछ विवादास्पद शब्दों (जैसे “कपड़ा तेरे बाप का”) में ऑडियो डबिंग के जरिए आंशिक बदलाव किए थे, लेकिन संवादों का टोन, लहजा, सड़कछाप तुकांत शैली और पूज्य पात्रों के प्रति गैर-जिम्मेदाराना अभिव्यक्ति अभी भी जस की तस बनी हुई है।

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पत्रकार गोपाल डी आर्यन ने बताया, “श्री हनुमान जी के मुख से सड़कछाप शैली में संवाद बुलवाना, लक्ष्मण जी के लिए ओछी शब्दावली का प्रयोग करना और प्रकांड विद्वान रावण को हॉलीवुड की डार्क-गॉथिक फंतासी की तर्ज पर चमगादड़ की सवारी करते दिखाना केवल कलात्मक स्वतंत्रता (क्रिएटीव लिबर्टी ल) नहीं है। यह हमारी महान सांस्कृतिक विरासत, वाल्मीकि रामायण और रामचरितमानस की मूल आत्मा के साथ सीधे तौर पर खिलवाड़ है।”


इन मुख्य पक्षों को भेजा गया लीगल नोटिस
प्रेषित लीगल नोटिस में फिल्म निर्माण और वितरण से जुड़ी मुख्य संस्थाओं व व्यक्तियों को जिम्मेदार ठहराया गया है:

  • ओम राउत (निर्देशक व निर्माता)
  • मनोज मुंतशिर शुक्ला (संवाद व पटकथा लेखक)
  • भूषण कुमार एवं टी-सीरीज़ (मुख्य निर्माता व कॉपीराइट होल्डर)
  • केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीऐफसी)
  • नेटफ्लिक्स इंडिया (डिजिटल/ओटीटी)
    केबल टीवी नियम 1994 और संविधान का उल्लंघन
    नोटिस में केबल टेलीविजन नेटवर्क (नियमन) नियम, 1994 के ‘प्रोग्राम कोड’ (रूल 6) का स्पष्ट हवाला देते हुए कहा गया है कि कोई भी ऐसा कार्यक्रम टीवी पर प्रसारित नहीं किया जा सकता जो धार्मिक भावनाओं को आहत करता हो या बच्चों व युवाओं के नैतिक व सांस्कृतिक मूल्यों पर प्रतिकूल प्रभाव डालता हो। इसके अलावा भारतीय न्याय संहिता (बिएनएस) के तहत धार्मिक आस्था को ठेस पहुँचाने और संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत नागरिकों की धार्मिक स्वतंत्रता का हनन करने का आधार भी नोटिस में शामिल किया गया है।
    मांगें और आगे की विधिक योजना
    नोटिस में सभी विपक्षीगणों को 15 दिनों का समय देते हुए निम्नलिखित मांगें रखी गई हैं:
  • टीवी सेटेलाइट चैनलों, नेटफ्लिक्स (ओटीटी) और अन्य इंटरनेट मीडिया से फिल्म के प्रसारण पर तत्काल अंतरिम रोक (स्टे) लगाई जाए।
  • सेंसर बोर्ड (सीबीऐफसी) फिल्म के दिए गए प्रदर्शन प्रमाणपत्र की पुनः समीक्षा कर इसे रद्द (रिवॉक) करे।
  • मेकर्स द्वारा धार्मिक व सांस्कृतिक आस्था को ठेस पहुँचाने हेतु सार्वजनिक रूप से माफी मांगी जाए।
    गोपाल डी आर्यन का कहना है कि यदि नियत समय के भीतर संबंधित मंत्रालयों, टीवी निकायों और निर्माताओं द्वारा प्रसारण रोकने की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो वे आने वाली पीढ़ी के सांस्कृतिक संरक्षण और जनहित में सक्षम उच्च न्यायालय (हाई कोर्ट) में जनहित याचिका (पीआईएल) दायर करेंगे।
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