ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी भीमताल में हरित पहल पर संवाद -200 से अधिक विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा
भीमताल, 16 सितंबर। ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी, भीमताल कैंपस में बुधवार को “ग्रीन इनिशिएटिव्स एंड सस्टेनेबिलिटी” विषय पर संवादात्मक सत्र आयोजित किया गया। विश्वविद्यालय के इको क्लब, एनसीसी और एनएसएस के संयुक्त तत्वावधान में हुए कार्यक्रम में 200 से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने के साथ दैनिक जीवन में सतत और पर्यावरण-अनुकूल आदतें अपनाने के लिए प्रेरित करना रहा।
सत्र में पशुपति ग्रुप के डिप्टी जनरल मैनेजर (EHS एवं Sustainability) विमल रस्तोगी मुख्य वक्ता रहे। कैंपस निदेशक ने पौधा भेंट कर उनका स्वागत किया। इसे पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया।
विमल रस्तोगी ने चर्चा की शुरुआत इस सवाल से की कि “क्या ग्रीन केवल एक रंग है या इससे कहीं अधिक?” उन्होंने कहा कि सस्टेनेबिलिटी केवल सरकारी नीतियों, औद्योगिक पहलों या पर्यावरण अभियानों तक सीमित नहीं है, बल्कि रोजमर्रा के छोटे-छोटे फैसलों से भी इसका सीधा संबंध है।
उन्होंने ऑनलाइन फूड डिलीवरी, ई-कॉमर्स में अत्यधिक पैकेजिंग, सिंगल यूज प्लास्टिक बोतलों, भोजन की बर्बादी और अनावश्यक बिजली खपत जैसे उदाहरणों के जरिए विद्यार्थियों को दैनिक गतिविधियों के पर्यावरणीय प्रभाव समझाए।
“जब हम किसी वस्तु को दूर फेंकते हैं, तो वह दूर आखिर कहां है?” सवाल के माध्यम से उन्होंने कचरे के निस्तारण के बाद की प्रक्रिया पर भी विचार करने के लिए विद्यार्थियों को प्रेरित किया। उन्होंने कचरे के उचित पृथक्करण और वैज्ञानिक प्रबंधन की आवश्यकता पर जोर दिया।
प्लास्टिक के रीसाइक्लिंग की दी जानकारी
सत्र में प्लास्टिक रीसाइक्लिंग और रेजिन आइडेंटिफिकेशन कोड (RIC) की जानकारी भी दी गई। विद्यार्थियों को बताया गया कि सामान्यतः प्लास्टिक को 1 से 7 तक के कोड से वर्गीकृत किया जाता है। PET और HDPE जैसे प्लास्टिक अपेक्षाकृत सामान्य रूप से रीसाइकिल किए जाते हैं, जबकि पॉलीस्टाइरीन, मल्टीलेयर पैकेजिंग, सिंगल यूज फिल्म और दूषित प्लास्टिक का प्रसंस्करण अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
उन्होंने बताया कि अलग किए गए प्लास्टिक कचरे को यांत्रिक प्रक्रिया से श्रेड कर संसाधित किया जा सकता है और उससे रेजिन पेलेट्स के रूप में कच्चा माल प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने घरों और संस्थानों में स्रोत स्तर पर कचरा पृथक्करण को प्रभावी अपशिष्ट प्रबंधन के लिए जरूरी बताया।
कार्यक्रम में जल एवं ऊर्जा संरक्षण, उत्सर्जन नियंत्रण, कचरा पृथक्करण, रीसाइक्लिंग, संसाधन पुनर्प्राप्ति और सर्कुलर इकोनॉमी जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। विद्यार्थियों को संसाधनों के पुनः उपयोग और रीसाइक्लिंग के महत्व से अवगत कराया गया।
कार्यक्रम के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र हुआ। विद्यार्थियों ने घर और कैंपस में पर्यावरण-अनुकूल आदतें अपनाने से जुड़े सवाल पूछे। इको क्लब, एनसीसी और एनएसएस के स्वयंसेवकों ने विश्वविद्यालय की हरित पहलों को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाने की प्रतिबद्धता जताई।
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