चिकित्सीय लापरवाही पर डॉक्टर, नर्सिंग होम व बीमा कंपनी को 1.04 लाख रुपये का भुगतान करने के आदेश
जिला उपभोक्ता आयोग ने चिकित्सीय सेवा में लापरवाही के मामले में डॉक्टर को दोषी ठहराते हुए मरीज को हर्जाना देने के आदेश दिए हैं। आयोग ने दोषी चिकित्सक, उसके नर्सिंग होम और बीमा कंपनी को आदेशित किया है कि वे उपभोक्ता को उपचार खर्च ₹44,349 रुपये मय 6 प्रतिशत ब्याज, क्षतिपूर्ति ₹50,000 रुपये तथा वाद व्यय ₹10,000 रुपये का भुगतान 45 दिन के भीतर करें।
वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीगोपाल नारसन ने बताया कि ग्राम भंगेड़ी महावतपुर निवासी माधोराम ने डॉ. कोकिला गुप्ता द्वारा कराए गए अल्ट्रासाउंड में किडनी में पथरी पाए जाने पर 17 नवंबर 2020 से 21 नवंबर 2020 तक सहारनपुर स्थित शांति सर्जिकल एंड मैटरनिटी सेंटर में डॉ. विनीता मल्होत्रा से ऑपरेशन कराया।
ऑपरेशन के बाद डॉक्टर ने मरीज को बताया कि ऑपरेशन के दौरान किडनी में पथरी नहीं मिली। इस पर मरीज ने मेरठ में डॉ. शालीन शर्मा और डॉ. विनीत श्रीवास्तव से दोबारा अल्ट्रासाउंड कराया, जिसमें किडनी में पथरी पाई गई। जांच करने वाले चिकित्सकों ने बताया कि ऑपरेशन करने वाली डॉ. विनीता मल्होत्रा सर्जन नहीं हैं, बल्कि स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं।
सर्जन न होते हुए भी गलत ऑपरेशन करने और गलत निदान के कारण मरीज को हुई परेशानी को आयोग ने चिकित्सीय सेवा में घोर लापरवाही माना। आयोग के अध्यक्ष गगन कुमार गुप्ता और सदस्य डॉ. अमरेश रावत ने दोषी डॉक्टर, नर्सिंग होम और बीमा कंपनी को संयुक्त रूप से हर्जाना अदा करने के आदेश दिए।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि आदेश का पालन 45 दिन के भीतर नहीं किया गया, तो समस्त हर्जाना राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देय होगा।
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संपादक – फास्ट न्यूज़ उत्तराखण्ड
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