16 माह से वेतन को तरसे वन विभाग के आउटसोर्स कर्मचारी -हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

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नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने वन विभाग में कई वर्षों से कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों को उपनल कर्मचारियों की तर्ज पर ‘समान कार्य के लिए समान वेतन’ समेत अन्य लाभ दिए जाने की मांग से जुड़ी याचिका पर सुनवाई की। न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ ने राज्य सरकार को 18 सितंबर तक जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने सरकार से यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि कर्मचारियों को अब तक वेतन का भुगतान क्यों नहीं किया गया।

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मामले के अनुसार, वन विभाग में आउटसोर्स एजेंसी के माध्यम से डेटा एंट्री ऑपरेटर और ड्राइवर के पदों पर कार्यरत कृष्णानंद भट्ट समेत अन्य कर्मचारियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि वे पिछले कई वर्षों से विभाग में सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन उन्हें पिछले 16 महीनों से वेतन का भुगतान नहीं किया गया है।

कर्मचारियों ने याचिका में आरोप लगाया है कि राज्य सरकार उनके साथ भेदभाव कर रही है। उनके मुताबिक, उपनल के माध्यम से नियुक्त कर्मचारियों को विभिन्न सुविधाएं और लाभ दिए जा रहे हैं, जबकि समान प्रकृति का कार्य करने के बावजूद आउटसोर्स कर्मचारियों को इन लाभों से वंचित रखा जा रहा है।

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याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उन्हें लाभ न दिए जाने का आधार केवल यह बताया जा रहा है कि उनकी नियुक्ति उपनल के माध्यम से न होकर किसी अन्य आउटसोर्स एजेंसी के जरिए हुई है। कर्मचारियों का तर्क है कि जब कार्य और जिम्मेदारियां समान हैं तो केवल नियुक्ति के माध्यम के आधार पर वेतन और सुविधाओं में अंतर करना उचित नहीं है।

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याचिका में कर्मचारियों ने अदालत से मांग की है कि उन्हें भी उपनल कर्मचारियों की तर्ज पर समान कार्य के लिए समान वेतन और अन्य सुविधाएं प्रदान की जाएं। साथ ही पिछले 16 महीनों से लंबित वेतन का भुगतान कराने के लिए राज्य सरकार को निर्देश देने की मांग की गई है।

हाईकोर्ट ने मामले में राज्य सरकार से जवाब मांगा है और अगली सुनवाई 18 सितंबर को निर्धारित की है।

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