UK…हाईकोर्ट का सरकार से तीखा सवाल: नेपाली मूल के लोग किस नीति के तहत रह रहे भारत में, कैसे खरीद रहे जमीन?

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नैनीताल। उत्तराखंड हाई कोर्ट ने नेपाली मूल के लोगों द्वारा नैनीताल और आसपास के क्षेत्रों में सरकारी व वन विभाग की भूमि पर कथित अतिक्रमण तथा अवैध तरीके से भारतीय दस्तावेज बनवाकर कब्जा किए जाने के मामले में सख्त रुख अपनाया है। मामले में सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि आखिर नेपाली मूल के लोग किस नीति के तहत भारत में रह रहे हैं और उनके द्वारा भूमि खरीद कैसे की जा रही है। कोर्ट ने सरकार को तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

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मुख्य न्यायाधीश और न्यायमूर्ति की खंडपीठ ने बुधवार को इस जनहित याचिका पर सुनवाई की।

सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से शपथपत्र पेश कर कहा गया कि वर्ष 1950 की भारत-नेपाल संधि के तहत भारतीय नागरिक नेपाल में तथा नेपाली नागरिक भारत में रह सकते हैं और रोजगार भी कर सकते हैं। इस पर याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि यदि कोई नेपाली नागरिक भारत में जमीन खरीदता है तो उसे भारतीय रिजर्व बैंक की प्रक्रिया के माध्यम से होना चाहिए, जबकि नेपाल में भारतीयों को ऐसी सुविधा व्यवहारिक रूप से नहीं मिल रही है।

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दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने सरकार से स्पष्ट नीति कोर्ट में पेश करने को कहा है, जिसके आधार पर नेपाली मूल के लोग यहां निवास कर रहे हैं और भूमि खरीद रहे हैं।

मामले के अनुसार नैनीताल निवासी ने जनहित याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि पिछले कई वर्षों से नेपाल से आए लोगों ने नैनीताल शहर समेत ग्राम सभा खुर्पाताल के तोक खाड़ी स्थित बजून चौराहे के पास सरकारी, नजूल और वन भूमि पर कब्जा कर आवासीय निर्माण कर लिया है।

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याचिका में यह भी कहा गया है कि करीब 25 परिवारों ने कथित रूप से अवैध तरीके से आधार कार्ड, वोटर आईडी, ड्राइविंग लाइसेंस, स्थायी निवास प्रमाण पत्र, राशन कार्ड और स्वास्थ्य कार्ड जैसे दस्तावेज तैयार कर सरकारी योजनाओं का लाभ लिया है। मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद होने की संभावना है।

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