केंद्रीय बजट 2026-27: आयकर में राहत नहीं -पूंजीगत व्यय बढ़ा, एसएमई और सुधारों पर जोर

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नई दिल्ली, 1 फरवरी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को लोकसभा में वित्त वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट पेश किया। बजट में कर दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जबकि पूंजीगत व्यय, सुधारों और दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता पर खास फोकस रखा गया है।


बजट भाषण के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं—
आयकर दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया।
वायदा एवं विकल्प (एफ एंड ओ) सौदों पर प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) बढ़ाकर क्रमशः 0.05 प्रतिशत और 0.15 प्रतिशत किया गया।

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विदेशी पर्यटन पैकेज की बिक्री पर स्रोत पर कर संग्रह (टीसीएस) की दर दो प्रतिशत तय की गई।
उदारीकृत धनप्रेषण योजना (एलआरएस) के तहत विदेश में शिक्षा और चिकित्सा खर्च पर भी दो प्रतिशत टीसीएस लगाया जाएगा।


नया आयकर अधिनियम, 2025 एक अप्रैल से लागू होगा, नियम और फॉर्म शीघ्र जारी किए जाएंगे।
बिना ऑडिट वाले व्यवसायों के लिए आयकर रिटर्न (आईटीआर) दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 अगस्त कर दी गई।


विदेशी कंपनियों को भारत के डेटा सेंटर से वैश्विक सेवाएं देने पर 2047 तक कर अवकाश मिलेगा।
वित्त वर्ष 2026-27 में राजकोषीय घाटा जीडीपी के 4.3 प्रतिशत पर रखने का लक्ष्य।
जीडीपी में ऋण का अनुपात 56.1 प्रतिशत से घटाकर 55.6 प्रतिशत किया गया।
बजट का कुल आकार 53.5 लाख करोड़ रुपये रखा गया।
सरकारी पूंजीगत व्यय 11.11 लाख करोड़ से बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये किया गया।
राज्यों को कर हिस्सेदारी के रूप में 1.4 लाख करोड़ रुपये आवंटित।
शुद्ध कर संग्रह 28.7 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान।
सकल बाजार उधारी 17.2 लाख करोड़ रुपये अनुमानित।
बजट का फोकस ‘तीन कर्तव्य’— वृद्धि की रफ्तार तेज करना, आकांक्षाओं को पूरा करना और सबका साथ-सबका विकास।
‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ के तहत अब तक 350 से अधिक सुधार लागू।
एसएमई के लिए 10,000 करोड़ रुपये का वृद्धि कोष बनाने का प्रस्ताव।
सीमाशुल्क में विश्वास-आधारित प्रणाली, एडवांस रुलिंग की वैधता अवधि पांच वर्ष तक बढ़ाई गई।
सेवा क्षेत्र के योगदान को 2047 तक 10 प्रतिशत तक बढ़ाने के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित करने का प्रस्ताव।

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