UP…दूसरी शादी के बाद भी गुजारा भत्ता क्यों? हाईकोर्ट ने परिवार न्यायालय से मांगा जवाब
तलाकशुदा महिला की दूसरी शादी के बाद भी उसे गुजारा भत्ता दिए जाने के मामले में झांसी के परिवार न्यायालय से स्पष्टीकरण तलब किया है। इलाहाबाद अदालत ने पूछा है कि जब महिला के पुनर्विवाह की जानकारी रिकॉर्ड पर थी, तब भी पूर्व पति को हर महीने 10 हजार रुपये गुजारा भत्ता देने का आदेश क्यों दिया गया।
न्यायमूर्ति ने पूर्व पति की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। याचिका में झांसी परिवार न्यायालय के अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें महिला को 10 हजार रुपये और बेटे को 5 हजार रुपये प्रतिमाह गुजारा भत्ता देने का निर्देश दिया गया था।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि 30 जुलाई 2025 को दोनों पक्षों का तलाक हो गया था और लगभग एक महीने बाद महिला ने दूसरी शादी कर ली। इसके संबंध में परिवार न्यायालय में हलफनामा भी दाखिल किया गया था। इसके बावजूद पूर्व पति को महिला के लिए गुजारा भत्ता देने का आदेश जारी कर दिया गया।
अदालत ने झांसी परिवार न्यायालय के अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश से इस संबंध में विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई को होगी।
गौरतलब है कि सामान्यतः लागू कानून के अनुसार, तलाकशुदा महिला के पुनर्विवाह के बाद उसे पूर्व पति से गुजारा भत्ता मिलने का अधिकार समाप्त हो जाता है। हालांकि, बच्चे के गुजारा भत्ते का अधिकार अलग कानूनी प्रावधानों के तहत तय किया जाता है।
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संपादक – फास्ट न्यूज़ उत्तराखण्ड
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