Uttarakhand : दूषित पानी से बीमारी और मौतों पर हाईकोर्ट सख्त -अधिकारियों को लगाई फटकार
–‘लापरवाही से फैली बीमारी, इलाज और पूरी व्यवस्था की जिम्मेदारी भी आपकी’
नैनीताल। ज्योलीकोट, गांजा, वीरभट्टी, छीणा, बेलुवाखान और सरियाताल क्षेत्र में दूषित पेयजल से बीमारियों और मौतों के मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अधिवक्ता रवि बिष्ट की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए वरिष्ठ न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ के समक्ष जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल, सीएमओ डॉ. रश्मि पंत, जल संस्थान के अधीक्षण अभियंता विशाल कुमार, जल निगम के अधीक्षण अभियंता अनीश कुमार और मुख्य अभियंता आलोक उपस्थित हुए।
खंडपीठ ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि समय रहते सीवर और पेयजल लाइनों की मरम्मत कर दी जाती तो ग्रामीणों को इस संकट का सामना नहीं करना पड़ता। अदालत ने स्थिति को महामारी जैसी गंभीर स्थिति बताते हुए तत्काल राहत और प्रभावी निगरानी के निर्देश दिए।
20 से 25 जल स्रोतों के नमूने लेने के आदेश
अदालत ने पेयजल निगम के सचिव को कुमाऊं क्षेत्र में प्रस्तावित जल परीक्षण प्रयोगशाला को जल्द मंजूरी देने के निर्देश दिए। साथ ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी को नैनीताल और आसपास के 20 से 25 जल स्रोतों से पानी के नमूने लेकर छह दिन के भीतर जांच रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत करने को कहा।
जिलाधिकारी को प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों की स्वयं निगरानी करने, टैंकरों के माध्यम से शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने तथा ज्योलीकोट के साथ नैनीताल शहर में सीवर रिसाव की शिकायतों के समाधान के लिए तत्काल हेल्पलाइन नंबर जारी करने के निर्देश दिए गए।
विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध नहीं तो बाहर से बुलाएं
स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर भी हाईकोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की। खंडपीठ ने कहा कि 21वीं सदी में इस तरह की स्थिति बेहद चिंताजनक है। सरकारी अस्पतालों में यदि विशेषज्ञ चिकित्सक उपलब्ध नहीं हैं तो बिना किसी संकोच के बाहर से विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम बुलाई जानी चाहिए।
अदालत के रुख के बाद जिलाधिकारी ने प्रभावित मरीजों के निजी प्रयोगशालाओं में एलाइजा सहित आवश्यक जांच कराने के लिए चार लाख रुपये का बजट जारी किया है। जरूरत पड़ने पर बजट बढ़ाने की बात भी कही गई है।
याचिकाकर्ता की ओर से दर्जनों मरीजों की लिवर संबंधी जांच रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश की गईं। प्रभावित लोगों के नि:शुल्क उपचार और मुआवजे की मांग भी उठाई गई। इस पर अदालत ने जिलाधिकारी से मुआवजे के संबंध में जानकारी मांगी।
आठ डॉक्टरों की टीम और एक एंबुलेंस तैनात
सीएमओ डॉ. रश्मि पंत ने अदालत को बताया कि दूषित पानी के कारण प्रभावित क्षेत्रों में बीमारियां फैली हैं। गांवों में आठ डॉक्टरों की टीम, एक एंबुलेंस और मेडिकल स्टाफ तैनात किया गया है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर क्लोरीन की गोलियां और ओआरएस के पैकेट वितरित कर रही हैं।
प्रशासन और जल संस्थान के अधिकारियों ने अदालत को बताया कि पुराने कूड़ा खड्ड के पास जल स्रोत में सीवर का पानी मिलने के कारण दूषित पेयजल की समस्या उत्पन्न हुई।
इस पर हाईकोर्ट ने अधिकारियों को कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि बीमारी आपकी लापरवाही के कारण फैली है, इसलिए इसके उपचार और प्रभावित लोगों के लिए पूरी व्यवस्था की जिम्मेदारी भी आपकी ही होगी।
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संपादक – फास्ट न्यूज़ उत्तराखण्ड
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