उत्तराखंड…नीम : प्रकृति की प्राकृतिक कीटनाशक फैक्टरी–घर पर बनाइए प्रभावी नीम बीज गिरी अर्क

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नीम केवल एक वृक्ष नहीं, बल्कि प्राकृतिक कीट प्रबंधन का महत्वपूर्ण स्रोत है। इसकी पत्तियों, बीजों और गिरी में पाए जाने वाले जैव सक्रिय तत्व अनेक फसली कीटों के प्रबंधन में सहायक होते हैं। विशेष रूप से अज़ादिरैक्टिन (Azadirachtin) नामक प्राकृतिक यौगिक कीटों की वृद्धि, भोजन करने की क्षमता और प्रजनन चक्र को प्रभावित करता है।

रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता कम करने तथा खेती की लागत घटाने के लिए किसान घर पर भी नीम बीज गिरी अर्क (Neem Seed Kernel Extract-NSKE) तैयार कर सकते हैं। यह जैविक खेती तथा एकीकृत कीट प्रबंधन (IPM) में व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है।

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आवश्यक सामग्री

  • पकी हुई नीम की निंबोलियाँ – लगभग 5 किलोग्राम
  • स्वच्छ पानी
  • सूती कपड़ा
  • तरल साबुन या अनुशंसित स्प्रेडर/स्टिकर (5–10 मिली प्रति 10 लीटर घोल)

बनाने की विधि

1. निंबोलियाँ सुखाएँ:
पकी हुई निंबोलियों को छाया में सुखाएँ। धूप में अधिक देर सुखाने से सक्रिय तत्वों में कमी आ सकती है।

2. गिरी अलग करें:
सूखने के बाद छिलका हटाकर गिरी निकालें। पाँच किलोग्राम निंबोलियों से लगभग 2.5–3 किलोग्राम गिरी प्राप्त हो सकती है।

3. दरदरा पीसें:
गिरी को दरदरा कूट या पीस लें।

4. अर्क तैयार करें:
गिरी के पाउडर को सूती कपड़े की पोटली में बाँधकर लगभग 10 लीटर पानी में 24–48 घंटे तक छाया में भिगोएँ। बीच-बीच में पानी हिलाते रहें।

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5. छानकर उपयोग करें:
पोटली को अच्छी तरह निचोड़कर घोल छान लें और छिड़काव से पहले स्प्रेडर या तरल साबुन मिला दें।

नीम का अर्क कैसे काम करता है?

  • रिपेलेंट: कीटों को फसल से दूर रखने में मदद करता है।
  • एंटीफीडेंट: कीटों का भोजन करना कम करता है।
  • ग्रोथ रेगुलेटर: कीटों की वृद्धि और प्रजनन को प्रभावित करता है।

सावधानियाँ

  • छिड़काव सुबह या शाम करें।
  • ताज़ा तैयार घोल का शीघ्र उपयोग करें।
  • प्रारंभिक कीट प्रकोप या बचाव के लिए प्रयोग अधिक प्रभावी रहता है।
  • आवश्यकता अनुसार 10–15 दिन के अंतराल पर दोबारा छिड़काव करें।
  • गंभीर प्रकोप की स्थिति में कृषि विशेषज्ञ की सलाह लेकर समेकित कीट प्रबंधन (IPM) अपनाएँ।
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नीम आधारित जैविक कीट प्रबंधन खेती की लागत कम करने, पर्यावरण संरक्षण तथा लाभकारी कीटों की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। यह विशेष रूप से जैविक खेती और फल एवं सब्जी उत्पादकों के लिए उपयोगी विकल्प है।

लेखक: दीपक आर्य, क्षेत्र अधिकारी, जनपद नैनीताल
इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइज़र कोऑपरेटिव लिमिटेड (IFFCO)

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