9वीं में तीसरी भाषा अनिवार्य क्यों? सुप्रीम कोर्ट ने सीबीएसई की नीति पर उठाए सवाल
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) द्वारा कक्षा 9 से तीसरी भाषा अनिवार्य किए जाने की व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि 9वीं और 10वीं बोर्ड परीक्षा की तैयारी का महत्वपूर्ण चरण होता है, ऐसे में नई भाषा जोड़ने से विद्यार्थियों पर अनावश्यक शैक्षणिक दबाव बढ़ता है। अदालत ने सुझाव दिया कि यदि तीसरी भाषा पढ़ाई जानी है तो इसकी शुरुआत कक्षा 5 या 6 से की जानी चाहिए।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना ने कहा कि 9वीं कक्षा पहले से ही छात्रों के लिए तनावपूर्ण होती है। ऐसे में इस स्तर पर नई भाषा शुरू करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि तीसरी भाषा जितनी जल्दी पढ़ाई जाए, उतना बेहतर होगा।
यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब हाल ही में सीबीएसई ने मौजूदा कक्षा 9 के विद्यार्थियों को एकमुश्त राहत देते हुए कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा में तीसरी भाषा अनिवार्य करने से छूट दी है। स्कूलों, अभिभावकों और छात्रों की ओर से नीति को अचानक लागू करने पर जताई गई चिंताओं के बाद यह फैसला लिया गया था।
यह मामला तमिलनाडु सरकार की उस अपील की सुनवाई के दौरान सामने आया, जिसमें मद्रास हाईकोर्ट के 2017 के आदेश को चुनौती दी गई है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को प्रत्येक जिले में जवाहर नवोदय विद्यालय स्थापित करने में सहयोग करने का निर्देश दिया था। तमिलनाडु सरकार लंबे समय से तीन-भाषा नीति का विरोध करती रही है और राज्य में दो-भाषा नीति लागू होने का हवाला देती रही है।
सुनवाई के दौरान तमिलनाडु सरकार की ओर से कहा गया कि तीसरी भाषा केवल कक्षा 9 से अनिवार्य होती है। इस पर न्यायमूर्ति नागरत्ना ने टिप्पणी करते हुए कहा, “9वीं में नई भाषा शुरू करना सही नहीं है। इसे 6वीं कक्षा से शुरू किया जाना चाहिए।”
अपने छात्र जीवन का अनुभव साझा करते हुए न्यायमूर्ति नागरत्ना ने बताया कि उनके स्कूल में तीसरी भाषा की पढ़ाई मिडिल स्कूल से शुरू होती थी, जिससे माध्यमिक स्तर तक विद्यार्थी उस भाषा में सहज हो जाते थे।
उन्होंने केंद्र सरकार से भी आग्रह करते हुए कहा कि सीबीएसई, आईसीएसई और राज्य बोर्डों में 9वीं कक्षा से तीसरी भाषा अनिवार्य नहीं की जानी चाहिए, क्योंकि 10वीं बोर्ड परीक्षा का दबाव 8वीं के अंतिम चरण से ही शुरू हो जाता है।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कोई अंतिम आदेश पारित नहीं किया है, लेकिन न्यायालय की टिप्पणियों ने कक्षा 9 में तीसरी भाषा लागू करने की नीति पर नई बहस छेड़ दी है।
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संपादक – फास्ट न्यूज़ उत्तराखण्ड
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