जंग में फंसे उत्तराखंड के युवा, घर लौटना हुआ कई गुना महंगा और दुश्वार

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हल्द्वानी। इजराइल-ईरान तनाव के बीच खाड़ी देशों में फंसे उत्तराखंड के लोगों के लिए वतन वापसी बेहद मुश्किल और महंगी होती जा रही है। नैनीताल जिले का एक नवदंपति 26 दिन बाद किसी तरह कुवैत से घर पहुंचा, लेकिन इसके लिए उन्हें कई देशों से होकर लंबा और बेहद खर्चीला सफर तय करना पड़ा।


जानकारी के अनुसार सामान्य परिस्थितियों में करीब 12 हजार रुपये और चार घंटे में पूरा होने वाला सफर अब दो से ढाई लाख रुपये और चार से पांच दिन में पूरा हो रहा है। यही वजह है कि हल्द्वानी के कुसुमखेड़ा निवासी हरीश सिंह समेत कई लोग अब भी कुवैत में फंसे हुए हैं।
हरीश सिंह ने बताया कि दूतावास और प्रशासन की ओर से सऊदी अरब के जेद्दा होते हुए श्रीलंका और फिर भारत लौटने का विकल्प दिया जा रहा है, लेकिन यह रूट बेहद महंगा पड़ रहा है। आर्थिक तंगी के कारण उन्होंने फिलहाल घर वापसी टाल दी है। उन्होंने बताया कि हालात इतने खराब हैं कि हाल ही में उनके रूट के पास हुए हमले में एक तेल डिपो में आग लग गई थी।
महंगा और लंबा सफर बना मजबूरी

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ट्रैवल एजेंसियों के मुताबिक कुवैत से जेद्दा तक करीब 15 से 18 घंटे का सड़क मार्ग तय करना पड़ रहा है, जिसके लिए अलग से वीजा लेना पड़ता है। इसके बाद जेद्दा से श्रीलंका और फिर कोच्चि या दिल्ली पहुंचकर ही लोग अपने घर लौट पा रहे हैं।

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मदद के नाम पर ‘खुद इंतजाम’
प्रभावित लोगों का आरोप है कि हेल्पलाइन पर संपर्क करने पर उन्हें खुद ही टिकट, वीजा और यात्रा की व्यवस्था करने को कहा जा रहा है, जिससे आर्थिक बोझ कई गुना बढ़ गया है। नैनीताल के गणेश कांडपाल ने बताया कि उनके बेटे-बहू को कुवैत से ओमान होते हुए भारत लौटने में करीब ढाई लाख रुपये खर्च करने पड़े। वहीं धारी ब्लॉक की राधिका देवी ने दुबई में फंसे अपने बेटे की सुरक्षित वापसी के लिए प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है।

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बोले अधिकारी
जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी योगेश उनियाल ने बताया कि दूतावासों के माध्यम से ट्रांजिट वीजा समेत जरूरी मदद दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि अभी तक विशेष उड़ानों को लेकर कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी नहीं हुए हैं।

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