पिथौरागढ़ में चार जिला जनजाति कल्याण अधिकारी पद सृजित -भू-जल प्रभार व निजी विश्वविद्यालय को भी कैबिनेट की मंजूरी
देहरादून। उत्तराखंड मंत्रिमंडल ने पिथौरागढ़ जनपद में विभागीय योजनाओं के प्रभावी संचालन और क्रियान्वयन को देखते हुए विभागीय ढांचे के पुनर्गठन को स्वीकृति प्रदान की है। इसके तहत शासनादेश संख्या-120, दिनांक 28 फरवरी 2025 के माध्यम से जनपद में चार जिला जनजाति कल्याण अधिकारियों के पद सृजित किए गए हैं। स्वीकृत पदों को सेवा नियमावली में सम्मिलित किए जाने के उद्देश्य से उत्तराखण्ड जनजाति कल्याण राजपत्रित अधिकारी सेवा (संशोधन) नियमावली, 2025 को प्रख्यापित किए जाने का निर्णय भी कैबिनेट द्वारा लिया गया।
कैबिनेट ने राज्य में गैर कृषिकारी उपयोग हेतु भू-जल के निकास पर जल मूल्य/प्रभार की नई दरें तत्काल प्रभाव से लागू करने का निर्णय लिया है। कृषि, कृषि संबंधी कार्यों तथा राजकीय पेयजल व्यवस्था को इससे बाहर रखा गया है। यह निर्णय भू-जल के अनियंत्रित दोहन को नियंत्रित करने, शुद्ध जल विकास एवं प्रबंधन को विनियमित करने तथा उद्योगों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लिया गया है।
औद्योगिक इकाइयों एवं अन्य व्यावसायिक उपयोग जैसे रेजीडेंशियल अपार्टमेंट/ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी, होटल, वॉटर एम्यूजमेंट पार्क, वाहन धुलाई केंद्र, स्विमिंग पूल आदि के लिए सुरक्षित, अर्ध-गंभीर, गंभीर एवं अतिदोहित क्षेत्रों के अनुसार जल मूल्य/प्रभार की दरें लागू की जाएंगी। इसके साथ ही वाणिज्यिक, औद्योगिक, अवसंरचनात्मक एवं रेजीडेंशियल अपार्टमेंट/ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी के लिए ₹5000 पंजीकरण शुल्क निर्धारित किया गया है।
राज्य को शिक्षा हब के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से कैबिनेट ने जनपद देहरादून में “जीआरडी उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय” नाम से एक निजी विश्वविद्यालय की स्थापना को मंजूरी दी है। विश्वविद्यालय का उद्देश्य शिक्षा में नवाचार, आधुनिक अध्यापन पद्धतियों को बढ़ावा देना, सामाजिक व आर्थिक रूप से वंचित वर्गों को शिक्षा उपलब्ध कराना, राज्य विषयक शोध को प्रोत्साहित करना तथा रोजगार के अवसर सृजित करना है।
इसके अतिरिक्त सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण उत्तरकाशी की चिन्यालीसौड़ एवं चमोली की गौचर हवाई पट्टियों को संयुक्त नागरिक एवं सैन्य संचालन के लिए एडवांस लैंडिंग ग्राउंड (ALG) के रूप में विकसित किए जाने को भी कैबिनेट की सहमति मिली है। दोनों हवाई पट्टियों को लीज के आधार पर रक्षा मंत्रालय, भारत सरकार को हस्तांतरित किया जाएगा, जिस पर भारतीय वायु सेना, रक्षा मंत्रालय और राज्य सरकार के बीच पूर्व में उच्च स्तरीय बैठकों में सहमति बन चुकी है।
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संपादक – फास्ट न्यूज़ उत्तराखण्ड
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