ग्राफिक एरा हिल विश्वविद्यालय भीमताल में एआई आधारित शिक्षण पर पांच दिवसीय एफडीपी का शुभारंभ

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भीमताल। ग्राफिक एरा हिल विश्वविद्यालय, भीमताल परिसर के स्कूल ऑफ मैनेजमेंट द्वारा सोमवार को पाँच दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (FDP) का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का विषय “The Future of Teaching and Learning in the Age of Artificial Intelligence” रहा। उद्घाटन पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में कुमाऊँ विश्वविद्यालय, नैनीताल के कंप्यूटर साइंस विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सुनील कुमार अरोड़ा उपस्थित रहे। उनका स्वागत एवं सम्मान किया गया।


इस अवसर पर ग्राफिक एरा हिल विश्वविद्यालय, भीमताल परिसर के निदेशक ने कहा कि Artificial Intelligence को लेकर जहां कुछ लोग इसे चुनौती मानते हैं, वहीं कुछ इसे अवसर के रूप में देख रहे हैं, ठीक उसी तरह जैसे इंटरनेट के आगमन के समय प्रतिक्रियाएं देखने को मिली थीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि तकनीकी विकास के बावजूद शिक्षकों की भूमिका सदैव महत्वपूर्ण बनी रहेगी। एआई शिक्षण प्रक्रिया को सहयोग दे सकता है, लेकिन शिक्षक का मार्गदर्शन और मेंटरशिप कभी भी प्रतिस्थापित नहीं की जा सकती।

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निदेशक ने प्रतिभागियों से Artificial Intelligence को एक सहयोगी उपकरण के रूप में अपनाने का आह्वान किया और आशा व्यक्त की कि यह एफडीपी शिक्षण एवं शोध कार्यों में इसके प्रभावी उपयोग को बढ़ावा देगा।

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मुख्य अतिथि डॉ. सुनील कुमार अरोड़ा ने “Artificial Intelligence and the Future of Education” विषय पर व्याख्यान देते हुए बताया कि किस प्रकार एआई शिक्षण विधियों, अधिगम प्रक्रियाओं और शैक्षणिक अनुसंधान को नया स्वरूप दे रहा है। उन्होंने व्यक्तिगत शिक्षण, स्मार्ट क्लासरूम और डेटा आधारित निर्णय प्रणाली में एआई की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला।

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डॉ. अरोड़ा ने छात्र व्यवहार की निगरानी, एआई आधारित सुपरविजन, चैटबॉट सपोर्ट सिस्टम, एनएलपी टूल्स जैसे ऑटो करेक्शन, स्पीच-टू-टेक्स्ट, टेक्स्ट-टू-स्पीच, गेमिफिकेशन, वर्चुअल लैबोरेटरी और एआई आधारित प्रॉक्टरिंग जैसी आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी। उन्होंने शिक्षकों को शिक्षण एवं शोध में एआई की संभावनाओं को अपनाने के लिए प्रेरित किया।


कार्यक्रम का समापन औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। एफडीपी के पहले दिन प्रतिभागियों में उत्साह और जिज्ञासा का संचार देखने को मिला, जिससे आगामी सत्रों के लिए सकारात्मक वातावरण तैयार हुआ।

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