हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को प्राग फार्म में खड़ी फसल काटने की दी अनुमति

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नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने ऊधमसिंह नगर स्थित प्रसिद्ध प्राग फार्म की भूमि पर खड़ी फसल की कटाई और बिक्री करने की अनुमति दिए जाने को लेकर दायर एकलपीठ के आदेश को चुनौती देती विशेष अपील पर सुनवाई की। मामले की सुनवाई के बाद मुख्य न्यायाधीश जी नरेंद्र व न्यायमूर्ति आलोक महरा की खंडपीठ ने एकलपीठ के आदेश पर रोक लगाते हुए।याचिकाकर्ताओं को फसल काटने की अनुमति दे दी है। कोर्ट ने सरकार से इसमें जवाब भी पेश करने को कहा है।


प्राग भूमि पर खड़ी फसल पर हाईकोर्ट ने दिया फैसला: एकलपीठ के आदेश को अपीलकर्ता माधवी अग्रवाल और अन्य ने विशेष अपील के माध्यम से चुनौती दी थी। अपीलकर्ता के वरिष्ठ अधिवक्ता टीए खान ने बताया कि वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने एक आदेश जारी कर राज्य सरकार के हक में फैसला देते हुए कहा कि प्राग फ़ार्म की भूमि पर खड़ी फसल की कटाई व बिक्री सरकार करेगी और पैसे को एक अलग खाते में रखेगी।

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याचिकाकर्ताओं ने दिया ये तर्क: इस आदेश के खिलाफ पीड़ितों की तरफ से अपील की गई। उनके द्वारा विशेष अपील में कहा गया कि सरकार ने जमीन पर कब्जा ले लिया है, लेकिन इस भूमि पर खड़ी फसल पर उनका हक है।


सरकार का ये पक्ष था: दूसरी ओर सरकार की ओर से इसका विरोध करते हुए कहा गया है, प्रावधान राज्य सरकार के पक्ष में है और फसल की बिक्री व कटान राज्य सरकार की ओर से किया जाना चाहिए। राज्य सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि ऊधमसिंह नगर जिला प्रशासन ने फसल काट दी है। हालांकि अपीलकर्ता की ओर से कहा गया कि अभी फसल खड़ी है। इसलिए फसल कटाई व बिक्री करने का अधिकार उन्हें दिया जाये। फसल उनके द्वारा बोई गई जो अब पक चुकी है।

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हाईकोर्ट ने प्राग भूमि की फसल काटने की अनुमति दी: याचिकाकर्ताओं और सरकार दोनों पक्षों को सुनने के बाद मुख्य न्यायाधीश जी नरेंद्र व न्यायमूर्ति आलोक महरा की खंडपीठ ने एकलपीठ के आदेश पर रोक लगा दी। इसके साथ ही याचिकाकर्ताओं को फसल काटने की अनुमति दे दी है। कोर्ट ने सरकार से इसमें जवाब भी पेश करने को कहा है।

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क्या है प्राग भूमि मामला? प्राग भूमि का मामला अंग्रेजों के समय का है। अंग्रेज सरकार ने 1933 में किच्छा तहसील के 12 गांवों में फैली 5193 एकड़ जमीन प्राग नारायण अग्रवाल को 99 साल की लीज पर दी थी। 1966 में गवर्नमेंट एस्टेट ठेकेदारी अबोलिशन एक्ट के तहत लीज रद्द होने के बावजूद, प्राग फार्म ने इस जमीन पर अपना दावा बनाए रखते हुए कब्जा नहीं छोड़ा। प्रशासन ने 2014 में 1972 एकड़ भूमि पर कब्जा ले लिया था। अगस्त 2025 में उत्तराखंड हाईकोर्ट द्वारा प्राग फार्म की विशेष अपील खारिज किए जाने के बाद प्रशासन ने 1914 एकड़ जमीन पर कब्जा ले लिया था।

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