हिजाब इस्लाम की अनिवार्य धार्मिक प्रथा नहीं -इलाहाबाद हाईकोर्ट ने छात्रा की याचिका खारिज की

Fast News Uttarakhand - Latest Uttarakhand News in Hindi
खबर शेयर करें 👉

प्रयागराज, 25 अगस्त। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने स्कूल में हिजाब पहनने की अनुमति मांगने वाली कक्षा 11 की मुस्लिम छात्रा की याचिका खारिज कर दी। न्यायमूर्ति मुनीर और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की पीठ ने 21 अगस्त को दिए फैसले में कहा कि महिलाओं के लिए सिर पर स्कार्फ पहनना इस्लामी आस्था का अनिवार्य हिस्सा नहीं है।

प्रयागराज के टैगोर पब्लिक स्कूल की छात्रा सुकैना रिजवी ने अदालत में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया था कि स्कूल प्रबंधन ने हिजाब पहनने के कारण उसे कक्षा 11 में प्रवेश देने से इनकार कर दिया। छात्रा का कहना था कि वह कक्षा 6 से हिजाब पहनती आ रही है और इसे अपनी धार्मिक आस्था का हिस्सा मानती है।

फ़ास्ट न्यूज़ 👉  अनजान ऐप डाउनलोड करते ही खाते से उड़ाए 1.39 लाख -साइबर ठगों ने दो बैंक खातों को बनाया निशाना

स्कूल प्रबंधन ने अदालत में कहा कि निर्धारित स्कूल यूनिफॉर्म में हिजाब को शामिल करना संस्थान के ड्रेस कोड के अनुरूप नहीं होगा। स्कूल ने विद्यार्थियों के लिए निर्धारित वर्दी को अनुशासन और संस्थागत पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।

अदालत ने छात्रा के इस तर्क को स्वीकार नहीं किया कि सिर पर स्कार्फ पहनना उसके लिए अनिवार्य धार्मिक प्रथा है। पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता ऐसा कोई धार्मिक ग्रंथ, सामग्री या अन्य ठोस प्रमाण रिकॉर्ड पर नहीं ला सकी, जिससे यह साबित हो कि कक्षा के भीतर सिर ढकना इस्लाम में अनिवार्य धार्मिक प्रथा है।

फ़ास्ट न्यूज़ 👉  UKnews-भूमियाधार में खाई में गिरी दिल्ली के युवकों की स्कॉर्पियो -एक की मौत, दो के फंसे होने की सूचना

हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि किसी विद्यालय की निर्धारित वर्दी का निर्धारण मुख्य रूप से स्कूल के अधिकार क्षेत्र में आता है। केवल इस आधार पर कि छात्रा कक्षा 6 से हिजाब पहनती आ रही है, उसे स्कूल की निर्धारित वर्दी में बदलाव कराने का अधिकार नहीं मिल जाता।

फ़ास्ट न्यूज़ 👉  वीकेंड की भारी भीड़ से चरमराई यातायात व्यवस्था -सांसद अजय भट्ट ने पर्यटकों-श्रद्धालुओं से की अपील

वर्दी को लेकर अदालत ने बताई अहम भूमिका

अदालत ने विद्यालयों में निर्धारित वर्दी के महत्व पर भी जोर दिया। पीठ के अनुसार, स्कूल की वर्दी विद्यार्थियों में अनुशासन और समानता की भावना को बढ़ावा देती है, संस्थान की पहचान को प्रदर्शित करती है तथा विद्यार्थियों के बीच भेदभाव को कम करने में मदद करती है।

इस फैसले के साथ हाई कोर्ट ने छात्रा की हिजाब पहनकर स्कूल जाने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया।

ADVERTISEMENTS

Ad Ad Ad
सबसे पहले ख़बरें पाने के लिए -

👉 फ़ास्ट न्यूज़ के WhatsApp ग्रुप से जुड़ें

👉 फ़ास्ट न्यूज़ के फ़ेसबुक पेज़ को लाइक करें

👉 कृपया नवीनतम समाचारों से अवगत कराएं WhatsApp 9412034119