बागेश्वर जिले में सरकारी जमीन व पुराने बंगलों पर हुए अतिक्रमण हटाने के निर्देश
नैनीताल। उत्तराखंड हाई कोर्ट ने बागेश्वर जिले में सरकारी जमीन व पुराने बंगलों पर हुए अतिक्रमण के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। मामले की सुनवाई करते हुए वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी व न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खण्डपीठ ने जिलाधिकारी बागेश्वर को अतिक्रमण हटाने के लिए राजस्व, वन, लोक निर्माण विभाग व अन्य सम्बंधित विभागों की कमेटी गठित कर नौ माह के भीतर अतिक्रमण हटाने व उसकी रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने के निर्देश दिए हैं। इस मामले की सुनवाई अब नौ माह बाद होगी।
पिछली सुनवाई पर कोर्ट ने प्रशासन से स्थिति से अवगत कराने को कहा था। आज जिला प्रसाशन की तरफ से कहा गया कि सरकारी भूमि व सार्वजनिक सम्पत्तियों पर अतिक्रमण हुआ है। सम्पत्तियों पर कब्जा कर लोगों ने होटल, होम स्टे व रिसोर्ट खोल दिए हैं। जिन लोगों के द्वारा अतिक्रमण किया गया है । उन सभी को खाली करने का नोटिस दे दिया गया है। इसका विरोध करते हुए याचिकाकर्ता की तरफ से कहा गया कि प्रशासन ने केवल कोर्ट के आदेश पर औपचारिकता अदा की है। मामले के अनुसार गोपाल चंद वनवासी ने उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर कर कहा है कि गरुड़, बागेश्वर, कौसानी व चौकोड़ी समेत अन्य स्थानों पर 20 से ज्यादा रिजाँर्ट मालिकों के द्वारा सरकारी जमीन व सरकारी सम्पतियों पर कब्जा करके उनमें रिजॉर्ट खोल दिये हैं। इस सम्बंध में याचिकाकर्ता ने अगस्त 2024 को इसकी शिकायत दर्ज की थी मगर रसूकदार होने के चलते इन पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। पर्यटन सीजन के दौरान स्थानीय लोगों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जब सड़क पर जाम गलता है तो एम्बुलेंस तक कई घन्टे जाम में फंस जाती है। जनहित याचिका में कोर्ट से प्रार्थना की गई है कि सरकारी भूमि व सरकारी सम्पतियों से शिघ्र अतिक्रमण हटाया जाय।
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संपादक – फास्ट न्यूज़ उत्तराखण्ड
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