uttarakhand-ज्योलीकोट में पीलिया का कहर, दो मौतों से मचा हड़कंप

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16 वर्षीय किशोर और 26 वर्षीय महिला की मौत, दो मासूम बच्चियों के सिर से उठा मां का साया, ग्रामीणों में प्रशासन के खिलाफ आक्रोश

नैनीताल। ज्योलिकोट क्षेत्र में डायरिया, उल्टी-दस्त और टायफाइड के बाद अब पीलिया ने गंभीर रूप धारण कर लिया है। बीमारी की चपेट में आने से उपचार के दौरान एक 16 वर्षीय किशोर और 26 वर्षीय महिला की मौत हो गई। लगातार सामने आ रही मौतों से पूरे क्षेत्र में शोक के साथ ही दहशत का माहौल है। एक परिवार ने अपना इकलौता बेटा खो दिया, जबकि दो मासूम बच्चियां मां के स्नेह से वंचित हो गईं।

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सरियाताल निवासी 16 वर्षीय रितेश जीना अगस्त के मध्य से टायफाइड और उल्टी-दस्त से पीड़ित था। हालत बिगड़ने पर परिजन उसे हल्द्वानी से लेकर दिल्ली तक विभिन्न अस्पतालों में उपचार के लिए ले गए। बताया गया कि निजी अस्पतालों में लीवर प्रत्यारोपण का खर्च एक करोड़ रुपये से अधिक बताया गया, जो साधारण परिवार के लिए वहन करना संभव नहीं था। इसके बाद रितेश को दिल्ली स्थित राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान संक्रमण फेफड़ों और किडनी तक फैल गया। आखिरकार रितेश ने दम तोड़ दिया।

वहीं छीणा गांव निवासी 26 वर्षीय नीमा जोशी की भी पीलिया और गंभीर लीवर संक्रमण के चलते मौत हो गई। नीमा के पति नीरज जोशी वन विभाग में अस्थायी श्रमिक हैं। नीमा अपने पीछे चार वर्ष और डेढ़ वर्ष की दो मासूम बेटियां छोड़ गई हैं। परिवार के अनुसार, मृतका के परिवार के पांच अन्य सदस्य भी पीलिया की चपेट में हैं और उनका उपचार चल रहा है।

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जून से बीमारी की मार, अब व्यवस्था पर उठे सवाल

स्थानीय लोगों के अनुसार क्षेत्र में जून से ही बीमारी के मामले सामने आ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि शुरुआती स्तर पर बीमारी को गंभीरता से नहीं लिया गया, जिसके चलते स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई। अब मौतों और संक्रमण के बढ़ते मामलों ने क्षेत्र की स्वास्थ्य एवं पेयजल व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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ब्लॉक प्रमुख डॉ. हरीश बिष्ट समेत स्थानीय ग्रामीणों ने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए नाराजगी जताई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम उठाए जाते तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती।

लगातार बीमारी फैलने और दो लोगों की मौत के बाद क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग की निगरानी, पेयजल की गुणवत्ता की जांच और संक्रमित लोगों के समुचित उपचार की मांग तेज हो गई है।

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