पर्वतीय क्षेत्रों से बढ़ रहा पलायन बना खतरा : नेगी

खबर शेयर करें 👉

उत्तराखंड राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन की रफ्तार बढ़ती जा रही है। उतराखड प्रथक राज्य इसलिए बनाया गया था कि राज्य आंदोलनकारियों व शहीदों के सपनों का उत्तराखंड बन सके। उतराखड में रोज़गार, शिक्षा, स्वास्थ्य सड़क का विकास होगा लेकिन राज्य बने 23 साल होने जा रहे हैं, पर्वतीय क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहा है।
पर्वतीय जिलों में पौड़ी व अल्मोड़ा से सबसे ज्यादा युवा पलायन कर रहे हैं।

फ़ास्ट न्यूज़ 👉  उत्तराखंड...पांच दिन भारी बारिश का खतरा --उत्तराखंड में रेड अलर्ट, प्रशासन हाई अलर्ट पर


इस पलायन से गांव के गांव सुनसान है आदमियों की जगह पर जंगली जानवरों का बढ़ावा होते जा रहा है।आये दिन उतराखड के पर्वतीय क्षेत्रों में बाघ, तेंदूआ,भालू आदि जंगली जानवरों के कई लोगों की जान चली गई।
प्रताप सिंह नेगी समाजिक कार्यकर्ता ने बताया शिक्षा व स्वास्थ व रोजगार के चक्कर में तो पलायन तो हो ही रहा है।जो कुछ लोग बचे कुछे है जंगली जानवरों के भय के कारण पलायन करने के लिए मजबूर है। पहाड़ों की खेती के लिए बंदर व ब्रह्म (जंगली सुअर) सौल आदि जानवरों के द्धारा खेत खेत बरबात हो रहे हैं। इधर बाघ तेंदूआ भालू के द्धारा आये दिन हमले से लोग मारे जा रहे हैं।
नेगी का कहना है अगर जंगली जानवरों के लिए सरकार की तरफ से कोई रोकथाम नहीं हुई तो उतराखड राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन बडते जायेगा।
खेती करते हैं तो बंदर व ब्रह्म जंगली सुअरों का आतंक अगर जंगलों से घास या कोई अन्य कार्य करते हैं बाघ तेंदूआ भालू का भय क्या करें ऐसे में पलायन तो होना ही है।

ADVERTISEMENTS

फ़ास्ट न्यूज़ 👉  उत्तराखंड...तीनपानी बाईपास पर अब नहीं चलेगी लापरवाही --रॉन्ग साइड चलने वालों पर होगी बीएनएस की धारा 281 में कार्रवाई
Ad Ad
सबसे पहले ख़बरें पाने के लिए -

👉 फ़ास्ट न्यूज़ के WhatsApp ग्रुप से जुड़ें

👉 फ़ास्ट न्यूज़ के फ़ेसबुक पेज़ को लाइक करें

👉 कृपया नवीनतम समाचारों से अवगत कराएं WhatsApp 9412034119