उत्तराखंड कैबिनेट के बड़े फैसले : परिवहन, शिक्षा, उद्योग और वन क्षेत्रों में अहम बदलाव

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देहरादून । उत्तराखंड मंत्रिमंडल की बैठक में राज्य के विभिन्न महत्वपूर्ण क्षेत्रों को प्रभावित करने वाले कई बड़े फैसलों पर मुहर लगी। इन निर्णयों का असर परिवहन व्यवस्था, शिक्षा प्रणाली, औद्योगिक विकास, वन प्रबंधन और अल्पसंख्यक कल्याण जैसे क्षेत्रों में देखने को मिलेगा।


सबसे पहले परिवहन विभाग में उत्तराखंड मोटर यान (संशोधन) नियमावली 2026 को मंजूरी दी गई। साथ ही प्रवर्तन चालकों की वर्दी अब पुलिस विभाग के चालकों के अनुरूप निर्धारित की जाएगी। इसके अलावा राज्य परिवहन को मजबूत करने के लिए 250 नई बसों की खरीद को स्वीकृति दी गई। वहीं जीएसटी दर घटने के कारण पहले स्वीकृत 100 बसों की संख्या बढ़ाकर 109 कर दी गई है।


कुम्भ मेला 2027 की तैयारियों को गति देने के लिए हरिद्वार में निर्माण कार्यों की स्वीकृति प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। अब 1 करोड़ रुपये तक के कार्य मेलाधिकारी और 5 करोड़ तक के कार्य गढ़वाल मंडल आयुक्त स्तर से स्वीकृत किए जा सकेंगे।

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विधिक सेवा के क्षेत्र में भी अहम बदलाव करते हुए राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण नियमावली में संशोधन किया गया है। अब जिला सैनिक कल्याण अधिकारी को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में पदेन सदस्य बनाया जाएगा। साथ ही एसिड अटैक पीड़ितों को भी मुफ्त कानूनी सहायता के दायरे में शामिल किया गया है।


औद्योगिक विकास के तहत उपखनिज पर रॉयल्टी ₹7 से बढ़ाकर ₹8 प्रति क्विंटल कर दी गई है। वहीं आबकारी नीति के अनुरूप 6 प्रतिशत वैट दर को भी मंजूरी दी गई।


वन विभाग में बड़ा बदलाव करते हुए वन दरोगा के लिए शैक्षिक योग्यता इंटरमीडिएट से बढ़ाकर स्नातक कर दी गई है। साथ ही आयु सीमा में भी संशोधन किया गया है। इसके अलावा राज्य में मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने और मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने के लिए नई नीति को मंजूरी मिली है।

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अल्पसंख्यक शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। कक्षा 1 से 8 तक चलने वाले मदरसों की संबद्धता अब जिला स्तर पर दी जाएगी, जबकि कक्षा 9 से 12 तक के संस्थानों को रामनगर शिक्षा परिषद से संबद्धता लेनी होगी।


शिक्षा के क्षेत्र में विशेष शिक्षा शिक्षकों की नियुक्ति के लिए नई योग्यता तय की गई है। साथ ही संस्कृत शिक्षा सेवा नियमावली 2026 को लागू करने का निर्णय लिया गया, जिससे शिक्षकों के प्रमोशन में आ रही दिक्कतें दूर होंगी।

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इसके अतिरिक्त कार्मिक विभाग में भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए नई एसओपी तैयार करने का निर्णय लिया गया है। लोक निर्माण विभाग में दिव्यांग श्रेणी के पदों को पुनः सृजित करने को भी मंजूरी मिली है।


ठेकेदारी व्यवस्था में ‘डी’ श्रेणी के ठेकेदारों की निविदा सीमा 1 करोड़ से बढ़ाकर 1.5 करोड़ कर दी गई है। वहीं उच्च शिक्षा में शोध को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा शोध प्रोत्साहन योजना को अब अशासकीय अनुदानित महाविद्यालयों में भी लागू किया जाएगा।


इन सभी फैसलों से स्पष्ट है कि राज्य सरकार प्रशासनिक सुधार, रोजगार सृजन, शिक्षा गुणवत्ता और आधारभूत संरचना विकास पर विशेष ध्यान दे रही है।

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