अब पहाड़ के लोगों को पहाड़ी में बताए जाएंगे साइबर क्राइम के खतरे
हल्द्वानी। पुलिस साइबर अपराध से लोगों को बचाने के लिए रोज नए-नए नुस्खे इजाद कर रही है। अब पहाड़ में बसे लोगों को उनकी ही भाषा (कुमाउनी) में साइबर अपराध के खतरों के बारे में बताया जाएगा। इसके लिए आईजी कुमाऊं ने कप्तानों को निर्देश दिए हैं।
पिथौरागढ़-चम्पावत की पुलिस ने स्थानीय भाषा में लोगों से संवाद करना शुरू भी कर दिया है। पुलिस के इस अभियान की लोगों ने सराहना की है। आधुनिक समय में साइबर फ्रॉड सबसे बड़ी चिंता का विषय बनता जा रहा है। अनपढ़ लोगों के साथ ही पढ़े-लिखे लोग भी इससे बच नहीं पा रहे हैं। राजस्थान, पश्चिम बंगाल, बिहार, हरियाणा में साइबर ठग सबसे अधिक सक्रिय हैं।
यह साइबर ठग नौकरी के नाम पर, अंजान लिंक या मैसेज भेजकर, आवाज बदलकर कॉल करके, झूठे केस में फंसाने समेत तमाम झांसे देकर लोगों को जाल में फंसाते हैं। सीधे-साधे लोग आसानी से इनके झांसे में आ जाते हैं और लाखों रुपये चंद सेकेंड में गंवा देते हैं। पहाड़ के बुजुर्गों व सीधे-साधे लोगों के खातों पर भी अपराधी सेंध मार रहे हैं। जिस कारण पुलिस ने पहाड़ में बसे लोगों को उनकी कुमाउनी भाषा में संवाद कर साइबर अपराध के प्रति जागरूक करने का निर्णय लिया है।
बुजुर्गों को साइबर ठगों के आ रहे फोन पहाड़ में अकेले जीवन काट रहे कई बुजुर्गों को साइबर अपराधी कॉल कर मीठी-मीठी बातों में बहला फुसला रहे हैं। पिथौरागढ़ और चम्पावत में ऐसे ठगी के कुछ मामले सामने आए हैं। पिछले साल हुई थी कुमाऊं में 34 करोड़ की ठगी कुमाऊं के छह जिलों में पिछले साल नौ सौ से अधिक लोगों से करीब 34 करोड़ की ठगी हुई थी। लोगों ने जागरूकता के अभाव में अपनी जीवन भर की जमापूंजी को गंवाया। हालांकि इसमें से 40 प्रतिशत की पुलिस ने रिकवरी कराई। साइबर विशेषज्ञ सुमित पांडे ने लोगों से अवेयर होने की अपील की है।
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संपादक – फास्ट न्यूज़ उत्तराखण्ड
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