अल्मोड़ा के दशहरे में रावण परिवार का शक्ति प्रदर्शन -18 से बढ़कर 23 हुए पुतले, चार साल बाद लौटा अहिरावण

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–ढोल-नगाड़ों की गूंज और आतिशबाजी के बीच हुआ पुतलों का दहन

अल्मोड़ा। सांस्कृतिक नगरी अल्मोड़ा में दशहरा महोत्सव पर रावण परिवार के पुतलों का भव्य जुलूस निकला। ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच नगर के विभिन्न मोहल्लों से तैयार किए गए पुतलों को बाजार में घुमाने के बाद एसएसजे परिसर के जूलॉजी मैदान में आतिशबाजी के बीच दहन किया गया। इस बार रावण परिवार में पिछले साल के 18 के मुकाबले 23 पुतले शामिल किए गए, जबकि चार साल बाद अहिरावण की भी वापसी हुई।

23 पुतलों ने बढ़ाया दशहरे का रोमांच

अल्मोड़ा के दशहरे की खास पहचान रावण परिवार के विशाल और कलात्मक पुतले हैं। इस वर्ष रावण, कुंभकर्ण, मेघनाद, अतिकाय, अक्षय कुमार, अहिरावण, खर, दूषण, मारीच, ताड़का, नरांतक, मकरासुर, कालकेतु, कालकासुर, विक्रासुर, कराल, धूमकेतु और नरकासुर समेत कुल 23 पुतले महोत्सव का हिस्सा बने। पुतलों को नगर निगम पार्किंग में एकत्र करने के बाद जुलूस के रूप में बाजार से निकाला गया। कार्यक्रम में सबसे पहले ताड़का और अंत में रावण के पुतले का दहन किया गया।

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1860 से चली आ रही परंपरा, समय के साथ बढ़ता गया कुनबा

स्थानीय लोगों के मुताबिक, अल्मोड़ा में दशहरा मनाने की परंपरा वर्ष 1860 से चली आ रही है। शुरुआती दौर में केवल रावण के पुतले का दहन होता था। वर्ष 1976 में मेघनाद के पुतले को भी इसमें शामिल किया गया। इसके बाद धीरे-धीरे परंपरा का विस्तार हुआ और नगर के अलग-अलग मोहल्लों में रावण परिवार के पुतले तैयार किए जाने लगे। आज यही परंपरा अल्मोड़ा को देश-विदेश में विशिष्ट पहचान दिला रही है।

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हिंदू-मुस्लिम युवाओं की मेहनत से तैयार होते हैं पुतले

अल्मोड़ा के दशहरे की खूबसूरती सिर्फ विशाल पुतलों तक सीमित नहीं है। यहां सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल भी देखने को मिलती है। करीब एक महीने पहले से हिंदू और मुस्लिम युवा मिलकर पुतलों के निर्माण में जुट जाते हैं। स्थानीय परंपरा के अनुसार, पुराने समय में बिजली की व्यवस्था नहीं होने पर बद्रेश्वर में मशालों की रोशनी में रामलीला की शुरुआत हुई थी। रावण के एक पुतले से शुरू हुई यह परंपरा आज पहाड़ की सांस्कृतिक पहचान बन चुकी है।

जगह की कमी ने फीका किया सांस्कृतिक कार्यक्रमों का रंग

महोत्सव में इस बार स्थान की कमी के चलते सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित नहीं हो सके। हालांकि, पुतलों के निर्माण और दहन को लेकर लोगों में खासा उत्साह रहा। दशहरा समिति की ओर से पुतलों का प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार के लिए चयन भी किया गया।

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जनप्रतिनिधियों समेत उमड़ी दर्शकों की भीड़

महोत्सव में केंद्रीय मंत्री एवं सांसद अजय टम्टा, मुख्य अतिथि रंगकर्मी किरन दफौटी, समिति अध्यक्ष अजीत कार्की, सचिव वैभव पांडे, संयोजक धर्मेंद्र बिष्ट, विधायक मनोज तिवारी, दर्जामंत्री गंगा बिष्ट, गोविंद सिंह पिलखवाल, कुन्दन लटवाल, मेयर अजय वर्मा, भाजपा जिलाध्यक्ष महेश नयाल, पूर्व विधायक रघुनाथ सिंह चौहान, कैलाश शर्मा, पूर्व पालिकाध्यक्ष प्रकाश चंद्र जोशी, शोभा जोशी और एसडीएम संजय कुमार सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। ललित लटवाल समेत अन्य गणमान्य लोगों और बड़ी संख्या में दर्शकों ने भी महोत्सव में भाग लिया।

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