शंकराचार्य के समर्थन में उतरे उत्तराखंड के संत -प्रधानमंत्री को भेजा ज्ञापन
हल्द्वानी। मौनी अमावस्या के दिन ज्योतिर्मठ पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती एवं उनके अनुयायियों के साथ कथित रूप से किए गए प्रशासनिक दुर्व्यवहार के विरोध में उत्तराखंड के संत समाज ने एकजुट होकर आवाज उठाई है। अंतरराष्ट्रीय सप्त ऋषि अखाड़ा के संतों ने हल्द्वानी स्थित जागनाथ आश्रम में बैठक आयोजित कर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज्ञापन प्रेषित किया।

संतों ने आरोप लगाया कि मौनी अमावस्या स्नान के दौरान प्रयागराज कुम्भ क्षेत्र में शंकराचार्य ज्योतिर्मठ एवं उनके भक्तों के साथ शासन-प्रशासन द्वारा अमानवीय एवं अपमानजनक व्यवहार किया गया। साधु-संतों के साथ मारपीट, घसीटने और बल प्रयोग की घटनाओं को सनातन धर्म की आस्था पर सीधा प्रहार बताया गया।
ज्ञापन में कहा गया कि उत्तराखंड देवभूमि से जुड़े ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य से उनके पद का प्रमाण मांगना तथा नोटिस जारी करना सनातन परंपरा को आहत करने की साजिश प्रतीत होती है। संतों ने इसे न केवल सनातन धर्म, बल्कि देवभूमि उत्तराखंड का भी अपमान करार दिया।
संत समाज ने प्रधानमंत्री से मांग की कि इस पूरे प्रकरण पर गंभीर संज्ञान लिया जाए तथा शासन-प्रशासन द्वारा किए गए इस कथित जघन्य कृत्य के लिए ज्योतिर्मठ शंकराचार्य से सार्वजनिक रूप से क्षमा याचना की जाए, ताकि सनातन धर्म की आस्था अक्षुण्ण बनी रहे और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
बैठक में महामंडलेश्वर कैलाशानंद महाराज, महामंडलेश्वर ऋषिवर दीपकेश्वरानंद महाराज, अंतरराष्ट्रीय सप्त ऋषि अखाड़ा के राष्ट्रीय प्रवक्ता कृष्णचंद्र कांडपाल, धर्माचार्य आचार्य लोकेश, प्रधान पुजारी जागेश्वर धाम, पंडित जोशी, आचार्य निर्मल भट्ट एवं अमित भट्ट सहित कई संत एवं धर्माचार्य उपस्थित रहे।
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संपादक – फास्ट न्यूज़ उत्तराखण्ड
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