दुर्घटना के 15 दिन के बाद भी नहीं लग पाए स्पीड ब्रेकर
-आए दिन दुर्घटनाओं का बना रहता है खतरा
शिवेंद्र गोस्वामी
अल्मोड़ा। सरकार सड़क सुरक्षा के कितने दावे कर ले, लेकिन धरातल पर पालन नहीं हो रहा है। अगर विभाग ही काम ना करे तो किसे जिम्मेदार माना जाये। मामला अल्मोड़ा नगर से सटे पांडेखोला क्षेत्र का है। जहां एनएच ने खानापूर्ति के नाम पर स्पीड ब्रेकर तो लगाए, लेकिन जहां लगने चाहिए थे वहां लगाना छोडकर वहां लगाए जहां इतनी अधिक आवश्यकता नहीं थी। कुछ दिन पूर्व पांडेखोला क्षेत्र में एनएच पर एक सड़क दुर्घटना में नौ साल के मासूम की मौत हो गई। जिस जगह पर वह दुर्घटना हुई वहाँ पर सीधी सड़क है और अल्मोड़ा बाजार नहीं जाने वाले वाहन तथा भारी वाहन यहीं से होकर गुजरते हैं। यहीं पास में दो पेट्रोल पंप भी हैं। दिन भर सड़क पर वाहनों की आवाजाही लगी रहती है। पूर्व में भी लोगों की मांग रही थी कि क्षेत्र में सड़क पर गति अवरोधक लगे, लेकिन कुछ हुआ नहीं।
जहां दुर्घटना हुई वहीं पास में सड़क से नीचे की तरफ आंगनबाड़ी केंद्र है, जहां बच्चे आते जाते हैं और थोड़ी दूर पांडेखोला बाईपास पर एक स्कूल है। जहां स्थानीय बच्चे भी इसी सड़क से आते-जाते हैं। यहां सड़क किनारे भी कई गाड़ियां लगी रहती हैं, जिससे सड़क पर वाहन गुजरते समय जगह नहीं मिलने से बच्चे बुजुर्गों का चलना दूभर हो जाता है।
अब दुर्घटना के बाद विभाग चेता तो विभाग ने वहां आबादी क्षेत्र के दो बोर्ड लगा दिए कि आबादी क्षेत्र है, जो कि वाहन चलाने वाला गाड़ी चलाते समय पढ़ेगा या गाड़ी चलाएगा। जहां दुर्घटना हुई थी, वहां सीधी सड़क है और एक भी स्पीड ब्रेकर नहीं है। स्पीड ब्रेकर नहीं तो वाहनों की गति पर कैसे लगाम लगेगी। सही जगह पर विभाग के स्पीड ब्रेकर नहीं लगाने पर स्थानीय लोगों में भी रोष है। जाने कब विभाग को याद आएगी और स्पीड ब्रेकर लगेंगे।
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संपादक – फास्ट न्यूज़ उत्तराखण्ड
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