उत्तराखंड…मतदाताओं से छल पड़ा भारी : पार्षद का चुनाव रद्द, तीन माह में होंगे दोबारा चुनाव

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नैनीताल। चुनावी हलफनामे में आपराधिक मामलों की जानकारी छिपाना हल्द्वानी-काठगोदाम नगर निगम के वार्ड संख्या-9 (तल्ली बमौरी) के पार्षद राजेंद्र सिंह जीना को महंगा पड़ गया। जिला जज न्यायालय नैनीताल ने एक ऐतिहासिक फैसले में उनके निर्वाचन को शून्य घोषित करते हुए वार्ड में तीन माह के भीतर उपचुनाव कराने के निर्देश दिए हैं।

जिला जज प्रशांत जोशी की अदालत ने उपविजेता भाजपा प्रत्याशी गिरीश नैनवाल द्वारा दायर चुनाव याचिका पर सुनवाई करते हुए पाया कि राजेंद्र सिंह जीना ने वर्ष 2024 के निकाय चुनाव के दौरान अपने नामांकन पत्र और शपथ पत्र में लंबित आपराधिक मामलों तथा एक मामले में मिली अर्थदंड की सजा की जानकारी जानबूझकर छिपाई थी। अदालत ने इसे मतदाताओं के साथ प्रत्यक्ष छल और “भ्रष्ट आचरण” माना।

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याचिका में बताया गया था कि गिरीश नैनवाल महज 65 वोटों के अंतर से चुनाव हारे थे। सुनवाई के दौरान प्रतिवादी पक्ष और राज्य सरकार ने दलील दी कि केवल मुकदमे लंबित होना चुनाव लड़ने की अयोग्यता नहीं है, लेकिन अदालत ने सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि मतदाताओं को उम्मीदवार की आपराधिक पृष्ठभूमि जानने का मौलिक अधिकार है और इस जानकारी को छिपाकर उन्हें गुमराह किया गया।

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अदालत ने राजेंद्र सिंह जीना का निर्वाचन रद्द करते हुए गिरीश नैनवाल को सीधे विजयी घोषित करने की मांग भी खारिज कर दी। न्यायालय ने कहा कि यदि मतदाताओं को सही जानकारी उपलब्ध होती तो वे किसी अन्य उम्मीदवार को भी चुन सकते थे, इसलिए सीधे उपविजेता को विजयी घोषित करना लोकतांत्रिक सिद्धांतों के अनुरूप नहीं होगा।

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कोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग और जिला प्रशासन को निर्देश दिया है कि वार्ड संख्या-9 में तीन माह के भीतर उपचुनाव कराया जाए। साथ ही भ्रष्ट आचरण के दोषी पाए गए राजेंद्र सिंह जीना को इस उपचुनाव में भाग लेने से भी प्रतिबंधित कर दिया गया है।

यह फैसला चुनावी पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण और नजीर बनने वाला निर्णय माना जा रहा है।

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