हल्द्वानी : रिहायशी इलाकों में संचालित स्टोन क्रशरों के खिलाफ फूटा ग्रामीणों का गुस्सा -जिलाधिकारी से की शिकायत
हल्द्वानी (नैनीताल): हल्द्वानी-लालकुआं क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले आधा दर्जन गांवों के निवासियों ने क्षेत्र में चल रहे स्टोन क्रशरों से होने वाले प्रदूषण और स्वास्थ्य खतरों को लेकर मोर्चा खोल दिया है। स्थानीय ग्रामीणों और ग्राम प्रधानों ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर इन स्टोन क्रशरों की अनुमति तत्काल प्रभाव से रद्द करने और उन्हें स्थानांतरित करने की मांग की है।

50 प्रतिशत आबादी बीमारियों की चपेट में
शिकायती पत्र में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में प्रदूषण का स्तर इतना घातक हो चुका है कि नवजात बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, लगभग 50% आबादी दमा, टीबी, सिलिकोसिस और फेफड़ों के कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों की चपेट में है। समाचार रिपोर्टों का हवाला देते हुए बताया गया कि यह प्रदूषण आने वाली पीढ़ी के भविष्य के लिए गंभीर खतरा बन चुका है।
नियमों की सरेआम धज्जियां
ग्रामीणों ने पत्र में मुख्य रूप से हिमालय स्टोन क्रशर और हिमालय ग्रिड का उल्लेख करते हुए बताया कि ये इकाइयां मानकों का उल्लंघन कर रही हैं:
- स्कूलों पर असर: स्कूल का खेल का मैदान क्रशर से मात्र 200 मीटर दूर है। साथ ही, क्रशर के भारी वाहनों के कारण हाईवे पर लगने वाले जाम से स्कूली बच्चों के लिए दुर्घटनाओं का भय बना रहता है।
- दूरी के नियम: ये क्रशर राष्ट्रीय राजमार्ग-87 से मात्र 35 मीटर, रेलवे मार्ग से 150 मीटर और राजकीय इंटर कॉलेज मोतीनगर से केवल 250 मीटर की दूरी पर स्थित हैं।
- सिंचाई व्यवस्था को नुकसान: लालकुआं सिंचाई विभाग की नहरों और पाइपलाइनों को भी इन उद्योगों से क्षति पहुँच रही है, जिससे करीब 50-60 गांवों की खेती प्रभावित हो रही है।
35 वर्षों से जारी है संघर्ष
स्थानीय जनता वर्ष 1989-90 से इन प्रदूषणकारी इकाइयों के खिलाफ संघर्ष कर रही है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रदूषण निवारण अधिनियम 1981 और 1974 के उल्लंघन की पुष्टि आधिकारिक बैठकों में पहले भी हो चुकी है, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। फैक्ट्री मालिक लगातार नियमों की अनदेखी कर रहे हैं।
इन ग्राम पंचायतों ने उठाई आवाज
इस विरोध प्रदर्शन में मोतीनगर, ग्राम फत्ताबांगर, सूफी भगवानपुर, पदमपुर देवलिया और बकुलिया-सकुलिया के निवासी व ग्राम प्रधान शामिल हैं। पत्र पर ग्राम प्रधान रमेश चंद्र जोशी और अन्य जनप्रतिनिधियों के हस्ताक्षर हैं।
ग्रामीणों की चेतावनी: “यदि जनहित में इन क्रशरों को तत्काल बंद या स्थानांतरित नहीं किया गया, तो क्षेत्र के निवासियों के पास उग्र आंदोलन के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। हम अपने बच्चों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं करेंगे।”
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संपादक – फास्ट न्यूज़ उत्तराखण्ड
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