13 साल की दर्द भरी जंग खत्म: नम आंखों से हरीश राणा को अंतिम विदाई -ग्रीन पार्क में हुआ अंतिम संस्कार

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नई दिल्ली। 13 साल तक जीवन और पीड़ा के बीच चल रही लंबी जंग आखिरकार समाप्त हो गई। इच्छामृत्यु की अनुमति मिलने के बाद हरीश राणा ने अंतिम सांस ली और बुधवार को दिल्ली के ग्रीन पार्क में उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। अंतिम विदाई के समय माहौल बेहद भावुक रहा। परिवार, रिश्तेदारों और स्थानीय लोगों ने नम आंखों से उन्हें श्रद्धांजलि दी।


हरीश राणा का जीवन वर्ष 2013 में हुए एक दर्दनाक हादसे के बाद पूरी तरह बदल गया था। उस समय वह मात्र 19 वर्ष के थे और कोमा में चले गए थे। जुलाई 2010 में उन्होंने चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में सिविल इंजीनियरिंग में दाखिला लिया था और 2013 में अंतिम वर्ष के छात्र थे।

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बताया जाता है कि अगस्त 2013 में रक्षाबंधन के दिन वह अपनी बहन से मोबाइल फोन पर बात कर रहे थे। इसी दौरान पीजी की चौथी मंजिल से गिर गए, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं और वह कोमा में चले गए।
हादसे के बाद से हरीश पिछले 13 वर्षों से परमानेंट वेजिटेटिव स्टेट (स्थायी वनस्पति अवस्था) में थे। वह मशीनों के सहारे सांस ले रहे थे। उनकी आंखें कभी-कभी झपकती थीं, लेकिन वह न बोल पाते थे और न ही शरीर हिला पाते थे।

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इन वर्षों में परिवार ने इलाज के लिए हर संभव प्रयास किया। डॉक्टरों और अस्पतालों के चक्कर लगाने से लेकर न्यायालय का दरवाजा खटखटाने तक परिवार ने उम्मीद नहीं छोड़ी। हालांकि बेटे की लगातार पीड़ा को देखते हुए माता-पिता ने सुप्रीम कोर्ट से इच्छामृत्यु की अनुमति देने की गुहार लगाई।


सुप्रीम कोर्ट से पैसिव यूथेनेशिया (इच्छामृत्यु) की अनुमति मिलने के बाद हरीश को 14 मार्च को एम्स में भर्ती कराया गया था। इसके बाद डॉक्टरों ने धीरे-धीरे उनका लाइफ सपोर्ट सिस्टम हटाना शुरू किया। पिछले करीब एक सप्ताह से उन्हें खाना-पानी भी नहीं दिया जा रहा था और केवल दर्द व मानसिक तकलीफ कम करने के लिए दवाएं दी जा रही थीं।

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आखिरकार इस लंबी पीड़ा का अंत हुआ और हरीश ने अंतिम सांस ली। उनके निधन के बाद परिजनों और परिचितों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी।

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