सबूतों के अभाव में आरोपी बरी : हाईकोर्ट ने हत्या मामले में उम्रकैद की सजा पलटी, नीरज कुमार की रिहाई के आदेश
नैनीताल। जिला सत्र न्यायाधीश, पिथौरागढ़ की अदालत द्वारा हत्या के मामले में सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा को हाईकोर्ट ने निरस्त कर दिया है। न्यायमूर्ति रविंद्र मैथाणी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने अभियुक्त नीरज कुमार के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य रिकॉर्ड में उपलब्ध न होने के आधार पर यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया।
कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने में असफल रहा। ऐसे में सत्र न्यायालय द्वारा दी गई सजा को कायम रखना न्यायसंगत नहीं है। खंडपीठ ने यह भी निर्देश दिया कि यदि अभियुक्त नीरज कुमार के खिलाफ कोई अन्य मामला लंबित नहीं है, तो उसे तीन सप्ताह के भीतर रिहा किया जाए।
मामले के अनुसार, जिला सत्र न्यायाधीश, पिथौरागढ़ ने 9 अगस्त 2023 को नीरज कुमार निवासी ग्राम मच्छीखेत, तहसील थल, जिला पिथौरागढ़ को हत्या के जुर्म में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास और 50 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया था। इस फैसले के खिलाफ अभियुक्त ने जेल से ही हाईकोर्ट में अपील दायर की।
अपील की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अभियुक्त की ओर से पैरवी के लिए अधिवक्ता डीसीएस रावत को न्यायमित्र (एमिकस क्यूरी) नियुक्त किया। दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध साक्ष्यों का गहन परीक्षण करने के बाद खंडपीठ इस निष्कर्ष पर पहुंची कि अभियोजन का मामला संदेह से परे स्थापित नहीं हो सका।
घटना वर्ष 2020 की है, जब मृतक पुष्कर के चाचा गंगा सिंह ने 19 सितंबर को थल थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि नीरज कुमार ने पुष्कर को गोली मारकर उसकी हत्या कर दी। इसी आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच के बाद आरोपपत्र दाखिल किया था।
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अब नीरज कुमार की रिहाई का रास्ता साफ हो गया है, बशर्ते उसके खिलाफ कोई अन्य मामला विचाराधीन न हो।
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संपादक – फास्ट न्यूज़ उत्तराखण्ड
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