सूची का बहाना नहीं चलेगा : उत्तराखंड हाईकोर्ट का सख्त आदेश -विधवा को 25 लाख बीमा राशि देने के निर्देश

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नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने उत्तराखंड ग्रामीण बैंक की अपील खारिज करते हुए मृतक कांस्टेबल की विधवा के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने बैंक को निर्देश दिया है कि वह दमयंती नेगी को 25 लाख रुपये की बीमा राशि के साथ 5% वार्षिक ब्याज का भुगतान करे।


मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक खामियों के आधार पर किसी लाभार्थी को उसके वैध अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।

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मामले के अनुसार, उत्तराखंड पुलिस के कांस्टेबल नरेंद्र सिंह नेगी का वेतन खाता वर्ष 2015 से उत्तराखंड ग्रामीण बैंक में सक्रिय था। अगस्त 2021 में सड़क दुर्घटना में उनकी मृत्यु के बाद उनकी पत्नी ने ‘कॉम्पलिमेंट्री पुलिस एक्सीडेंटल डेथ इंश्योरेंस कवर’ के तहत 25 लाख रुपये का दावा किया, जिसे बैंक ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि उनका नाम पुलिस विभाग की भेजी सूची में शामिल नहीं था।

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अदालत ने बैंक की इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि योजना की मुख्य शर्त केवल सक्रिय वेतन खाता और नियमित वेतन क्रेडिट थी, जिसे मृतक पूरा कर रहे थे। न्यायालय ने टिप्पणी की कि विभागों के बीच समन्वय की कमी एक प्रशासनिक चूक है, जिसका खामियाजा परिवार को नहीं भुगतना चाहिए।


कोर्ट ने यह भी कहा कि बैंक मृतक की स्थिति से अनजान होने का दावा नहीं कर सकता, क्योंकि खाते में नियमित वेतन आता रहा और उसी आधार पर ऋण भी स्वीकृत हुआ था। समान परिस्थितियों में अन्य कर्मचारियों को लाभ देना और इस मामले में इंकार करना मनमाना और अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है।
खंडपीठ ने एकल पीठ के फैसले को बरकरार रखते हुए बैंक को तत्काल भुगतान करने का आदेश दिया।

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