पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में आरोपी बरी -हाईकोर्ट ने सत्र न्यायालय का फैसला किया रद्द

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नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने अपनी पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में दोषी ठहराए गए एक व्यक्ति को बड़ी राहत देते हुए दोषमुक्त करार दिया है। साथ ही सत्र न्यायालय उधमसिंहनगर के आदेश को निरस्त कर दिया गया है। यह मामला वर्ष 2011 से न्यायालय में विचाराधीन था। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति आशीष नैथानी की एकलपीठ में हुई।

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प्रकरण के अनुसार, अपीलकर्ता सुनील दत्त पाठक ने सत्र न्यायाधीश उधमसिंहनगर के 30 अगस्त 2011 के उस निर्णय को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें भारतीय दंड संहिता की धारा 306 के तहत दोषी ठहराते हुए सात वर्ष के कठोर कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई थी।


मामले में बताया गया कि 15 सितंबर 2004 को खटीमा क्षेत्र स्थित वैवाहिक घर में सुनील दत्त पाठक की पत्नी ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। ट्रायल कोर्ट ने दहेज हत्या और क्रूरता के आरोपों से आरोपी को बरी कर दिया था, लेकिन पत्नी के चरित्र पर संदेह और मानसिक प्रताड़ना को आधार बनाते हुए धारा 306 के तहत दोषसिद्धि की थी।

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हाईकोर्ट ने साक्ष्यों का परीक्षण करते हुए पाया कि अभियोजन पक्ष के गवाहों के बयान सामान्य और व्यापक प्रकृति के थे। न्यायालय ने यह भी कहा कि आत्महत्या से ठीक पहले किसी प्रत्यक्ष उकसावे या ठोस कृत्य का कोई स्पष्ट प्रमाण रिकॉर्ड पर उपलब्ध नहीं है।
इन्हीं आधारों पर हाईकोर्ट ने सत्र न्यायालय के निर्णय को अस्थिर मानते हुए निरस्त कर दिया और आरोपी को दोषमुक्त करार दे दिया।

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