उत्तराखंड में दो दिन भारी बारिश का अलर्ट -पांच जिलों में रेड अलर्ट
–सीएम धामी ने दिए अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश, संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने के आदेश
देहरादून। मौसम विभाग द्वारा अगले दो दिनों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी किए जाने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश में आपदा प्रबंधन की तैयारियों को लेकर अधिकारियों को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन से वार्ता कर रेड एवं ऑरेंज अलर्ट वाले जिलों में विशेष सतर्कता बरतने और संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखने को कहा है।
आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री मदन कौशिक ने भी मौसम विभाग की चेतावनी को गंभीरता से लेते हुए सचिव से प्रदेश में मौसम की स्थिति और तैयारियों की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को मौसम की स्थिति पर पैनी नजर रखने तथा संभावित परिस्थितियों से निपटने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पहले से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने शुक्रवार को सभी 13 जिलों के अधिकारियों के साथ बैठक कर अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार 26 सितंबर को पांच जिलों में रेड अलर्ट, पांच में ऑरेंज अलर्ट और तीन जिलों में येलो अलर्ट जारी किया गया है।
26 सितंबर का अलर्ट:
- रेड अलर्ट: बागेश्वर, पिथौरागढ़, चंपावत, नैनीताल और ऊधमसिंह नगर
- ऑरेंज अलर्ट: देहरादून, पौड़ी गढ़वाल, रुद्रप्रयाग, चमोली और अल्मोड़ा
- येलो अलर्ट: हरिद्वार, उत्तरकाशी और टिहरी गढ़वाल
वहीं 27 सितंबर को चार जिलों में रेड अलर्ट, चार में ऑरेंज अलर्ट और पांच जिलों में येलो अलर्ट जारी किया गया है।
27 सितंबर का अलर्ट:
- रेड अलर्ट: देहरादून, टिहरी गढ़वाल, पौड़ी गढ़वाल और हरिद्वार
- ऑरेंज अलर्ट: उत्तरकाशी, चमोली, नैनीताल और रुद्रप्रयाग
- येलो अलर्ट: बागेश्वर, अल्मोड़ा, चंपावत, ऊधमसिंह नगर और पिथौरागढ़
मौसम विभाग ने इस दौरान कई स्थानों पर भारी से बहुत भारी वर्षा तथा कुछ स्थानों पर अत्यधिक भारी वर्षा की संभावना जताई है। इसके चलते पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन और सड़कें अवरुद्ध होने, नदी-नालों एवं गाड़-गदेरों का जलस्तर बढ़ने तथा मैदानी क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति उत्पन्न होने की आशंका है।
सचिव आपदा प्रबंधन ने सभी जिलों को जिला आपातकालीन संचालन केंद्र 24 घंटे सक्रिय रखने के निर्देश दिए हैं। नदी-नालों, गाड़-गदेरों और जलस्रोतों के जलस्तर पर लगातार निगरानी रखने तथा जलस्तर बढ़ने पर आसपास के लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था करने को कहा गया है।
भूस्खलन संभावित क्षेत्रों और संवेदनशील सड़कों पर विशेष निगरानी के साथ जेसीबी एवं अन्य आवश्यक मशीनरी को रणनीतिक स्थानों पर तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि सड़क बंद होने की स्थिति में तत्काल यातायात सुचारू किया जा सके।
पुलिस, एसडीआरएफ, अग्निशमन, स्वास्थ्य, लोक निर्माण विभाग, पेयजल, विद्युत समेत सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय बनाए रखने और जरूरत के अनुसार राहत एवं बचाव दलों की तैनाती सुनिश्चित करने को कहा गया है।
चारधाम यात्रा मार्गों, प्रमुख पर्यटन स्थलों और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में यात्रियों की सुरक्षा के लिए भी विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। पर्वतीय मार्गों पर मौसम और सड़क की स्थिति को देखते हुए ही यातायात संचालित करने तथा भूस्खलन एवं अतिवृष्टि संभावित क्षेत्रों में अनावश्यक आवागमन से बचने की सलाह दी गई है।
सचिव आपदा प्रबंधन ने आमजन से मौसम विभाग और जिला प्रशासन की चेतावनियों का पालन करने, अनावश्यक यात्रा से बचने तथा नदी-नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूरी बनाए रखने की अपील की है।
आपात स्थिति में राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र के टोल फ्री नंबर 1070, जिला आपातकालीन संचालन केंद्र के नंबर 1077 और आपातकालीन सेवा 112 पर संपर्क किया जा सकता है।
ADVERTISEMENTS
सबसे पहले ख़बरें पाने के लिए -
👉 फ़ास्ट न्यूज़ के WhatsApp ग्रुप से जुड़ें
👉 फ़ास्ट न्यूज़ के फ़ेसबुक पेज़ को लाइक करें
👉 कृपया नवीनतम समाचारों से अवगत कराएं WhatsApp 9412034119
संपादक – फास्ट न्यूज़ उत्तराखण्ड
www.fastnewsuttarakhand.com

उत्तराखंड : कोसी नदी में डूबने से सेना के जवान की मौत -छुट्टी पर घर आया था जवान
उत्तराखंड : चोरगलिया से लापता तीनों बालिकाएं हिमाचल के बद्दी से सकुशल बरामद
22 नवंबर को देहरादून में ऐक्टू का विशाल प्रदर्शन -आशा वर्कर्स की भागीदारी का ऐलान
प्रदेश में साइकिल ट्रैक निर्माण की पहल का यूथ हॉस्टल एसोसिएशन ने किया स्वागत