बलात्कार मामले में बड़ा खुलासा -विवेचना अधिकारी पर आरोपी को लाभ पहुंचाने के आरोप, पीड़िता को बताया बालिग
काशीपुर। बलात्कार के एक गंभीर मामले में विवेचना अधिकारी द्वारा आरोपी को लाभ पहुंचाने के इरादे से पीड़िता की उम्र को लेकर न्यायालय को गुमराह किए जाने का मामला सामने आया है। न्यायालय की सख्ती के बाद अब आरोपी पर पॉक्सो अधिनियम के तहत आरोप तय किए जाने की दिशा में कार्यवाही आगे बढ़ी है।
आईटीआई क्षेत्र निवासी पीड़िता ने 10 दिसंबर 2019 को आईटीआई थाना काशीपुर में तहरीर देकर ग्राम बरखेड़ा पांडे निवासी दीपक सागर पुत्र राजेश कुमार, उसकी बहन एवं अन्य के खिलाफ बलात्कार सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था। पीड़िता ने मुकदमा दर्ज कराते समय स्वयं को 15 वर्ष की नाबालिग बताते हुए अपने शैक्षिक प्रमाण पत्र भी पुलिस को उपलब्ध कराए थे।
सूत्रों के अनुसार विवेचना अधिकारी ने आरोपी की बहन के कहने पर दीपक सागर को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से जांच में उसकी बहन समेत अन्य नामजद आरोपियों के नाम हटा दिए तथा मामले में केवल धारा 376 व 506 आईपीसी के अंतर्गत आरोप पत्र अपर सत्र न्यायाधीश/एफटीएससी रुद्रपुर न्यायालय में प्रेषित किया। जबकि पीड़िता ने न्यायालय में अपने बयान के दौरान भी स्वयं को नाबालिग बताया था।
इसके बाद पीड़िता ने अपने अधिवक्ता संजीव कुमार आकाश के माध्यम से न्यायालय में धारा 216 सीआरपीसी (आरोप में परिवर्तन) के अंतर्गत प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया। आरोपी पक्ष की ओर से इसका विरोध यह कहते हुए किया गया कि यह आवेदन वाद को अनावश्यक रूप से लंबित करने के उद्देश्य से दिया गया है।
न्यायालय ने तथ्यों की पुष्टि हेतु पीड़िता के शैक्षिक प्रमाण पत्र, संबंधित विद्यालय के प्रधानाचार्य तथा राजस्व निरीक्षक के बयान दर्ज कराए। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि घटना के समय पीड़िता नाबालिग थी। न्यायालय ने माना कि आरोपी के विरुद्ध पॉक्सो अधिनियम के अंतर्गत आरोप तय किया जाना न्यायसंगत है।
अदालत ने आरोपी दीपक सागर को धारा 5/6 पॉक्सो अधिनियम के तहत 12 जनवरी 2026 को न्यायालय में उपस्थित होने का आदेश दिया है। न्यायालय के इस निर्णय से पीड़िता को न्याय की उम्मीद जगी है।
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संपादक – फास्ट न्यूज़ उत्तराखण्ड
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