17 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी में 12 साल बाद बड़ी सफलता -पहचान बदलकर छिपे आरोपी को सीबीआई ने गोवा से दबोचा
नई दिल्ली। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने एक पुराने बैंक धोखाधड़ी मामले में बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए 17 करोड़ रुपये की ठगी के आरोपी आशुतोष पंडित को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी पुणे की कंपनी मेसर्स हाउस ऑफ लैपटॉप्स (आई) प्राइवेट लिमिटेड का निदेशक था और लंबे समय से फरार चल रहा था। गिरफ्तारी गोवा के बंबोलिम क्षेत्र से की गई, जहां वह यतिन शर्मा के नाम से पहचान बदलकर रह रहा था।
यह मामला वर्ष 2013 में इंडियन ओवरसीज बैंक की पुणे शाखा से जुड़ा है। शुरुआत में केस मुंबई की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (ईओडब्ल्यू) में दर्ज हुआ था, जिसे बाद में सीबीआई की पुणे इकाई को स्थानांतरित कर दिया गया। जांच के दौरान उसी वर्ष चार्जशीट दाखिल की गई, लेकिन आरोपी का पता नहीं चल सका। लगातार फरारी के चलते अप्रैल 2018 में उसे भगोड़ा घोषित किया गया था।
सीबीआई की टीम को एनएटीजीआरआईडी पोर्टल से अहम इनपुट मिले, जिसके आधार पर आरोपी की नई पहचान का खुलासा हुआ। जांच में सामने आया कि आशुतोष पंडित ने यतिन शर्मा के नाम से नया पैन कार्ड, आधार कार्ड और पासपोर्ट बनवाया था। पहले उसने नई दिल्ली से पासपोर्ट जारी कराया और बाद में गोवा से नया पासपोर्ट हासिल किया।
तकनीकी साक्ष्यों और खुफिया सूचनाओं के आधार पर सीबीआई ने सटीक ऑपरेशन चलाते हुए आरोपी को उसके नए पते से गिरफ्तार कर लिया। सीबीआई प्रवक्ता ने कहा कि इस तरह की कार्रवाइयां आर्थिक अपराधों पर अंकुश लगाने में मददगार हैं। बैंक धोखाधड़ी के मामले देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाते हैं और ऐसे अपराधियों को कानून के शिकंजे में लाना एजेंसी की प्राथमिकता है। गिरफ्तार आरोपी को अदालत में पेश किया जाएगा, जबकि मामले की आगे की जांच जारी है।
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संपादक – फास्ट न्यूज़ उत्तराखण्ड
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