ब्रेकिंग…डेढ़ साल के नन्हे ‘जीनियस’ ने कर दिया कमाल -170 से ज्यादा चीजें पहचानकर बनाया विश्वस्तरीय रिकॉर्ड

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सूरत/जूनागढ़। आमतौर पर डेढ़ से दो साल की उम्र में बच्चे बोलना और आसपास की चीजों को समझना शुरू करते हैं, लेकिन गुजरात के नन्हे कर्ण परमार ने अपनी असाधारण प्रतिभा से सबको हैरान कर दिया है। महज 1 साल 8 महीने की उम्र में कर्ण ने 170 से अधिक चीजों की पहचान कर इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज कराया, जबकि एक महीने बाद 1 साल 9 महीने की उम्र में उसे इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स द्वारा ‘सुपर टैलेंटेड किड (वन इन ए मिलियन)’ का सम्मान मिला।

5 जुलाई 2024 को जन्मे कर्ण परमार ने अपनी अद्भुत याददाश्त के दम पर यह उपलब्धि हासिल की। वह अंग्रेजी वर्णमाला, फल, सब्जियां, जंगली और पालतू जानवर, पक्षी, वाहन, विभिन्न आकृतियां, देशों के झंडे समेत 170 से अधिक चीजों को फ्लैश कार्ड के माध्यम से तुरंत पहचानकर उनका सही नाम बता देता है। उसकी इस प्रतिभा की आधिकारिक पुष्टि 14 मार्च 2026 को की गई।

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कर्ण के पिता मिथुनभाई परमार ने बताया कि उन्होंने बेटे को जन्म से ही मोबाइल और डिजिटल स्क्रीन से पूरी तरह दूर रखा। उसकी सीखने की क्षमता बढ़ाने के लिए केवल फ्लैश कार्ड, किताबें और शैक्षणिक गतिविधियों का सहारा लिया गया। उनका कहना है कि इतनी कम उम्र में बेटे को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान पूरे परिवार के लिए गर्व का विषय है।

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इस सफलता के पीछे कर्ण की मां नेहालबेन परमार की मेहनत और धैर्य की भी बड़ी भूमिका रही। उन्होंने नियमित रूप से फ्लैश कार्ड, किताबों और एजुकेशनल गेम्स के जरिए बच्चे की याददाश्त और ज्ञान को विकसित किया। ऐसे समय में जब अधिकांश छोटे बच्चे मोबाइल स्क्रीन की ओर आकर्षित हो रहे हैं, कर्ण की कहानी माता-पिता के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आई है।

मूल रूप से जूनागढ़ जिले के अंबालियाला गांव से जुड़े परमार परिवार का वर्तमान निवास सूरत में है, जबकि कर्ण का होमटाउन अमरेली जिले का केरियाचड गांव है। कर्ण के पिता सूरत में बारकोड प्रिंटर का व्यवसाय करते हैं। कर्ण की इस ऐतिहासिक उपलब्धि से सूरत, जूनागढ़, अमरेली, पूरे गुजरात और बाबर समाज में खुशी की लहर है।

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नन्हे कर्ण ने साबित कर दिया है कि प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती। उसकी यह उपलब्धि न केवल बच्चों बल्कि अभिभावकों के लिए भी प्रेरणा है कि सही मार्गदर्शन, धैर्य और गुणवत्तापूर्ण समय किसी भी बच्चे की छिपी प्रतिभा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है।

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