भारतीयता आधारित शिक्षा से राष्ट्र निर्माण का आह्वान -ज्योलीकोट में दो दिवसीय परिचायक वर्ग संपन्न
ज्योलीकोट (नैनीताल)। भारतीय शिक्षा व्यवस्था में भारतीयता, संस्कार और राष्ट्रभाव को केंद्र में रखने की आवश्यकता पर जोर देते हुए भारतीय शिक्षण मंडल, उत्तराखंड प्रांत का दो दिवसीय परिचायक वर्ग रविवार को ज्योलीकोट में संपन्न हो गया। कार्यक्रम में प्रदेशभर से पहुंचे कार्यकर्ताओं ने शिक्षा के भारतीय दृष्टिकोण, संगठन विस्तार और विद्यार्थियों में जीवन मूल्यों के विकास पर मंथन किया।

पी.पी.जे. सरस्वती विहार, ज्योलीकोट में 30 और 31 मई को आयोजित परिचायक वर्ग में उत्तराखंड के विभिन्न जनपदों से आए 37 कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य कार्यकर्ताओं को भारतीय शिक्षण मंडल की विचारधारा, कार्यपद्धति और गतिविधियों से परिचित कराना था।

उद्घाटन सत्र में डॉ. तरुण कुमार सक्सेना ने भारतीयता आधारित शिक्षा की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए वर्तमान शिक्षा परिदृश्य में भारतीय शिक्षण मंडल की भूमिका को रेखांकित किया। इसके बाद अखिल भारतीय युवा प्रमुख डॉ. अमित रावत ने “भारतीय शिक्षा दर्शन एवं शिक्षा में भारतीयता” विषय पर मार्गदर्शन देते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा, राष्ट्रीय शिक्षा नीति और मूल्य आधारित शिक्षा के महत्व को विस्तार से समझाया।
दूसरे दिन कार्यक्रम की शुरुआत जागरण, एकात्मता स्तोत्र और योग साधना से हुई। प्रतिभागियों ने योगाभ्यास के माध्यम से शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के महत्व को समझा। प्रो. सुमित्रा कुकरेती ने संगठन के कार्यों, कार्यक्रमों और विभिन्न विभागों की जानकारी देते हुए कार्यकर्ता विकास की 2+2+2+2 अवधारणा, मंडल संकल्पना (5+5+5+5+5) और अध्ययन समूहों की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की।
कार्यक्रम के दौरान आयोजित मंडल चर्चा में “विद्यार्थियों को मूल्यवान कैसे बनाएं” विषय पर विचार-विमर्श हुआ। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री या रोजगार तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि संस्कारवान, चरित्रवान और राष्ट्रहितैषी नागरिक तैयार करना भी होना चाहिए। चर्चा में विद्यार्थियों में राष्ट्रभाव, सामाजिक उत्तरदायित्व, नेतृत्व क्षमता और जीवन मूल्यों के विकास पर विशेष जोर दिया गया।
समापन सत्र की अध्यक्षता पी.पी.जे. सरस्वती विहार के प्रधानाचार्य डॉ. सूर्य प्रकाश ने की। मुख्य वक्ता प्रांत संघचालक डॉ. बी.एस. बिष्ट ने कहा कि भारतीयता आधारित शिक्षा व्यवस्था ही सशक्त राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है। उन्होंने शिक्षकों और शिक्षाविदों से भारतीय ज्ञान परंपरा एवं जीवन मूल्यों को शिक्षा प्रणाली में प्रभावी रूप से स्थापित करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के विभिन्न सत्रों का संचालन डॉ. तरुण कुमार सक्सेना, डॉ. अतुल मिश्र और श्री विजय ने किया। अंत में प्रतिभागियों ने भारतीय शिक्षा के संवर्धन तथा भारतीय शिक्षण मंडल के कार्यों को समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंचाने का संकल्प लिया। राष्ट्रगान के साथ दो दिवसीय परिचायक वर्ग का समापन हुआ।
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