530 रुपये के विवाद में उपभोक्ता पर 20 हजार का जुर्माना, आयोग ने लगाई फटकार
अल्मोड़ा। महज 530 रुपये की बैंक कटौती को लेकर दायर की गई शिकायत एक उपभोक्ता को महंगी पड़ गई। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने शिकायत को पूरी तरह आधारहीन बताते हुए परिवादी पर 20 हजार रुपये का जुर्माना ठोक दिया। आयोग ने साफ कहा कि यह मामला न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग का उदाहरण है।
मामला नरसिंह बाड़ी निवासी महेंद्र सिंह बूड़ाथोकी से जुड़ा है, जिन्होंने पंजाब नेशनल बैंक और अग्रणी बैंक कार्यालय के खिलाफ परिवाद दायर किया था। उनका आरोप था कि वर्ष 2008 से 2014 के बीच उनके बैंक खाते से न्यूनतम त्रैमासिक शेष राशि के 480 रुपये और एसएमएस सेवा शुल्क के 50.55 रुपये, कुल 530.55 रुपये बिना अनुमति काट लिए गए।
हालांकि सुनवाई के दौरान आयोग के सामने पेश साक्ष्यों ने परिवादी के दावे की हवा निकाल दी। अधिवक्ता मनोज कुमार पंत और एचपीएस नेगी के अनुसार आयोग की पीठ—अध्यक्ष रमेश कुमार जायसवाल, सदस्य बिद्या बिष्ट और सुरेश कांडपाल—ने पाया कि परिवादी के खाते में निर्धारित न्यूनतम 1000 रुपये की राशि मौजूद ही नहीं थी।
आयोग ने अपने आदेश में कहा कि बैंक द्वारा की गई कटौती पूरी तरह नियमों के अनुरूप थी। इसके बावजूद परिवादी ने जानबूझकर भ्रामक और आधारहीन तथ्य प्रस्तुत कर बैंक को अनावश्यक रूप से परेशान किया, जिससे न्यायिक समय और संसाधनों की भी बर्बादी हुई।
इसी आधार पर आयोग ने कड़ी टिप्पणी करते हुए इसे न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग करार दिया और परिवादी को 45 दिनों के भीतर 20 हजार रुपये का अर्थदंड जमा करने के निर्देश दिए।
आयोग ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट किया कि यदि बचत खाते में न्यूनतम बैलेंस नहीं रखा जाता, तो बैंक नियमों के तहत चार्ज स्वतः काटा जाता है। इसी तरह एसएमएस अलर्ट सेवा के लिए भी समय-समय पर निर्धारित शुल्क लिया जाता है, जो ग्राहक की सहमति पर आधारित होता है।
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संपादक – फास्ट न्यूज़ उत्तराखण्ड
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