स्टे ऑर्डर की धज्जियां उड़ाने का आरोप: रुद्रपुर विधायक शिव अरोरा समेत 9 पर अवमानना नोटिस

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मंदिर परिसर में तोड़फोड़ और मारपीट का आरोप
काशीपुर। सिविल जज सीनियर डिवीजन गुंजन सिंह की अदालत ने न्यायालय के स्थगन आदेश के बावजूद कथित रूप से भूखंड पर जबरन कब्जा, तोड़फोड़ और मारपीट के मामले में रुद्रपुर विधायक शिव अरोरा समेत नौ लोगों को अवमानना नोटिस जारी किया है। अदालत ने सभी आरोपितों को 23 जनवरी को स्वयं अथवा अपने अधिवक्ता के माध्यम से उपस्थित होकर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।


वादी पक्ष द्वारा दाखिल अवमानना याचिका में आरोप लगाया गया है कि न्यायालय द्वारा पारित निषेधाज्ञा आदेश की पूर्ण जानकारी होने के बावजूद आरोपियों ने उसका जानबूझकर उल्लंघन किया। याचिकाकर्ता कांता प्रसाद गंगवार ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से अदालत को बताया कि वह वार्ड संख्या छह/बीस स्थित भूखंड पर बीते लगभग 30 वर्षों से काबिज हैं। उक्त भूमि पर उनके ट्रस्ट के माध्यम से चंद्रदेव, मां काली और भैरव बाबा का मंदिर स्थापित है, जिसकी नियमित देखरेख के लिए ट्रस्ट द्वारा पुजारी नियुक्त किया गया है।

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मामले में अदालत ने चार अक्तूबर को वादी के पक्ष में अंतरिम निषेधाज्ञा आदेश पारित किया था, जो छह जनवरी 2026 तक प्रभावी है। आरोप है कि इस आदेश की जानकारी होने के बावजूद 21 दिसंबर को विधायक शिव अरोरा अपने सहयोगियों—गेदन लाल चंद्रा, राम प्रसाद चंद्रा, धर्मपाल, सत्यपाल चंद्रा, टीकाराम, ओमप्रकाश, राजेंद्र ‘पानी वाला’ और विजय पाल—तथा लगभग सौ अज्ञात लोगों के साथ विवादित भूखंड पर पहुंचे।

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याचिका में कहा गया है कि आरोपियों ने मौके पर पहुंचकर कमरे का ताला तोड़ा, कीमती सामान व नकदी उठा ली और मंदिर परिसर में तोड़फोड़ की। आरोप है कि विधायक के कथित निर्देश पर पुजारी रामचंद्र के साथ मारपीट की गई और उसका मोबाइल फोन छीन लिया गया। जब मौके पर मौजूद काजल गंगवार ने न्यायालय के आदेश का हवाला दिया तो विधायक कथित रूप से आक्रोशित हो गए और उनके कहने पर काजल गंगवार तथा बीच-बचाव में आई मीना के साथ भी मारपीट की गई।

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वादी पक्ष ने पूरे प्रकरण को न्यायालय के आदेशों की खुली अवहेलना बताया है। अदालत ने प्रथम दृष्टया मामले को गंभीर मानते हुए विधायक शिव अरोरा समेत सभी नौ आरोपितों को अवमानना नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

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