प्रधानाचार्य के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही रद्द -हाईकोर्ट ने खटीमा कोर्ट का सम्मन आदेश किया निरस्त

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नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने खटीमा के एक इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य केंद्र पाल सिंह के खिलाफ स्कूल फीस गबन के आरोप में जारी सम्मन आदेश और निचली अदालत में चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया है।

केंद्र पाल सिंह पर आरोप था कि उन्होंने जुलाई 2003 से अक्टूबर 2003 तक छात्रों की फीस में हेराफेरी की। इस मामले में खटीमा थाने में मुकदमा दर्ज हुआ था, जिसके आधार पर खटीमा कोर्ट ने उनके खिलाफ सम्मन जारी किया था। प्रधानाचार्य ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी।

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यह थे तर्क और न्यायालय की टिप्पणी
न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की एकलपीठ के समक्ष याची के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि फीस रिकॉर्ड रखने और जमा करने का कार्य स्कूल के क्लर्क की जिम्मेदारी थी, न कि प्रधानाचार्य की।
31 जुलाई 2004 को उनके खिलाफ प्रारंभिक आरोप पत्र दाखिल किया गया था, लेकिन आगे की जांच में 12 अगस्त 2008 को दायर पूरक आरोप पत्र में क्लर्क बसंत बल्लभ ओली को आरोपी बनाया गया, जबकि केंद्र पाल सिंह को दोषमुक्त बताया गया। राज्य सरकार ने भी हलफनामे में इस तथ्य का विरोध नहीं किया।

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हाईकोर्ट ने पाया कि न्यायिक मजिस्ट्रेट, खटीमा ने 12 अगस्त 2008 के पूरक आरोप पत्र पर संज्ञान नहीं लिया और पुराने आरोप पत्र के आधार पर ही 22 मार्च 2010 को समन जारी कर दिया।

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इन तथ्यों को देखते हुए हाईकोर्ट ने सम्मन आदेश व आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया।

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