हल्द्वानी में साइबर ठगों की पुलिसकर्मियों पर नजर -महिला सिपाही का इंस्टाग्राम हैक कर दरोगा को फंसाने की कोशिश

Fast News Uttarakhand - Latest Uttarakhand News in Hindi
खबर शेयर करें 👉

–सतर्कता से टली साइबर ठगी की साजिश, सहकर्मी महिला सिपाही के खाते से भेजे जा रहे थे संदेश

हल्द्वानी। साइबर अपराधियों के हौसले इस कदर बढ़ गए हैं कि अब वे पुलिसकर्मियों को भी निशाना बनाने की कोशिश कर रहे हैं। एसपी स्तर के एक अधिकारी को निशाना बनाने की कोशिश के बाद अब साइबर ठगों ने एक दरोगा को अपने जाल में फंसाने के लिए उसकी सहकर्मी महिला सिपाही के इंस्टाग्राम खाते का सहारा लिया। हैकर ने महिला सिपाही का खाता हैक कर उसकी मित्र सूची खंगाली और दरोगा को संदेश भेजने शुरू कर दिए। हालांकि, दरोगा की सतर्कता के चलते साइबर ठगों की साजिश नाकाम हो गई।

फ़ास्ट न्यूज़ 👉  उत्तराखंड में गुटखा-पान मसाला पर एक साल की रोक, निर्माण से बिक्री तक प्रतिबंध

जानकारी के अनुसार, महिला सिपाही को इस बात का पता ही नहीं चला कि उसका इंस्टाग्राम खाता कब हैक हो गया। खाते पर कब्जा करने के बाद हैकर ने उसकी मित्र सूची खंगाली। इसी दौरान उसे एक दरोगा का इंस्टाग्राम खाता दिखाई दिया। आगे की पड़ताल में उसे पता चला कि दरोगा और महिला सिपाही एक ही विभाग में सहकर्मी हैं। इसके बाद हैकर ने महिला सिपाही की पहचान का इस्तेमाल करते हुए दरोगा को इंस्टाग्राम पर संदेश भेजने शुरू कर दिए।

फ़ास्ट न्यूज़ 👉  उत्तराखंड बनेगा मेडिकल एजुकेशन हब -पांच साल में शुरू हुए तीन नए सरकारी मेडिकल कॉलेज

शुरुआत में दरोगा ने कुछ संदेशों का जवाब भी दिया, लेकिन घरेलू काम में व्यस्त होने के कारण उसने बाद में संदेशों को नजरअंदाज करना शुरू कर दिया। इस दौरान उसे संदेह हुआ तो उसने संदेशों का जवाब देने के बजाय सीधे महिला सिपाही को फोन कर लिया।

फोन पर बातचीत के दौरान महिला सिपाही ने बताया कि उसका इंस्टाग्राम खाता हैक हो चुका है। इसके बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ और दरोगा को निशाना बनाने की साइबर ठगों की कोशिश नाकाम हो गई।

फ़ास्ट न्यूज़ 👉  UK-बागेश्वर में 2.116 किलो चरस के साथ युवक गिरफ्तार, किशोर भी संरक्षण में लिया

सोशल मीडिया खातों की सुरक्षा जरूरी

यह घटना सोशल मीडिया खातों की सुरक्षा और संदिग्ध संदेशों के प्रति सतर्क रहने की जरूरत को रेखांकित करती है। किसी परिचित के खाते से असामान्य संदेश आने पर बिना पुष्टि किए उन पर भरोसा नहीं करना चाहिए। संबंधित व्यक्ति से सीधे फोन पर बात कर सत्यापन करना बेहतर है। साथ ही, दो-स्तरीय सुरक्षा (टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन) सक्रिय रखने और किसी के साथ ओटीपी या लॉगिन संबंधी जानकारी साझा नहीं करने से ऐसे साइबर अपराधों का जोखिम कम किया जा सकता है।

ADVERTISEMENTS

Ad Ad Ad Ad
सबसे पहले ख़बरें पाने के लिए -

👉 फ़ास्ट न्यूज़ के WhatsApp ग्रुप से जुड़ें

👉 फ़ास्ट न्यूज़ के फ़ेसबुक पेज़ को लाइक करें

👉 कृपया नवीनतम समाचारों से अवगत कराएं WhatsApp 9412034119