नवजात की सांस थमने पर पहला मिनट अहम -पुनर्जीवन तकनीक से बचाई जा सकती है जान

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-रुद्रपुर मेडिकल कॉलेज में नवजात पुनर्जीवन कार्यशाला आयोजित, नवजात मृत्यु दर कम करने पर दिया जोर

रुद्रपुर। राजकीय मेडिकल कॉलेज रुद्रपुर के सभागार में रविवार, 1 नवंबर को नवजात पुनर्जीवन कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का शुभारंभ फार्माकोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. हेमंत दत्त और बाल रोग विभाग की प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. ऋतु रखोलिया ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. सीपी भैसोड़ा ने कार्यशाला के सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं।

कार्यशाला में डॉ. ऋतु रखोलिया ने नवजात शिशुओं को जन्म के समय होने वाली सांस संबंधी समस्याओं और उनके समय पर उपचार के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि देश में नवजात मृत्यु दर को वर्ष 2030 तक एक अंक में लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए जन्म के समय शिशुओं को बेहतर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है।

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उन्होंने बताया कि नवजात शिशुओं की लगभग 25 से 30 प्रतिशत मौतें जन्म के समय सांस नहीं ले पाने की समस्या, यानी प्रसवकालीन श्वास अवरोध के कारण होती हैं। ऐसे मामलों में जन्म के तुरंत बाद उचित कदम उठाना जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

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डॉ. रखोलिया ने बताया कि गर्भ में शिशु को ऑक्सीजन और पोषक तत्व प्लेसेंटा के माध्यम से मिलते हैं, लेकिन जन्म के बाद उसे स्वयं सांस लेना शुरू करना होता है। यदि नवजात जन्म के तुरंत बाद सांस नहीं ले पाता है, तो उसके मस्तिष्क और हृदय तक ऑक्सीजन की पर्याप्त आपूर्ति नहीं हो पाती। इससे गंभीर जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए जन्म के बाद शुरुआती एक मिनट बेहद महत्वपूर्ण होता है।

उन्होंने कहा कि गर्भावस्था के दौरान गर्भजल की मात्रा कम या अधिक होना तथा गर्भवती महिला को अत्यधिक रक्तस्राव जैसी स्थितियों में नवजात को सांस लेने में कठिनाई हो सकती है। ऐसे शिशुओं को समय पर पहचानकर नवजात पुनर्जीवन तकनीक के माध्यम से आवश्यक सहायता दी जा सकती है और उनकी जान बचाने की संभावना बढ़ाई जा सकती है।

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कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्यकर्मियों को नवजात पुनर्जीवन के महत्व के प्रति जागरूक करना तथा जन्म के समय सांस लेने में कठिनाई का सामना करने वाले शिशुओं को समय पर उचित चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के प्रयासों को मजबूत करना रहा।

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