हाईकोर्ट सख्त: छात्रा की संदिग्ध मौत पर पुलिस से पूछा—मजिस्ट्रेट को सूचना क्यों नहीं दी?

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नैनीताल। उत्तराखंड हाई कोर्ट ने पिछले वर्ष ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी, भीमताल में बीसीए द्वितीय वर्ष की छात्रा, लखनऊ निवासी वैश्वी तोमर की हॉस्टल के कमरे में हुई संदिग्ध मौत के मामले में अहम सुनवाई की।

सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ ने पुलिस से कड़ा सवाल किया कि इस तरह की मौत की जानकारी संबंधित क्षेत्र के मजिस्ट्रेट को क्यों नहीं दी गई। कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया है कि इस संबंध में 2 मई तक स्पष्ट जवाब प्रस्तुत किया जाए।

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मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान मृतका के पिता कृष्ण कुमार की ओर से अदालत को बताया गया कि घटना के समय पुलिस ने नजदीकी मजिस्ट्रेट को सूचना दिए बिना ही पंचनामा भरकर शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। जबकि भारतीय न्याय संहिता की धारा 194 के तहत आत्महत्या जैसे मामलों में पहले मजिस्ट्रेट को सूचित करना और उनकी उपस्थिति में पंचनामा तैयार करना अनिवार्य है। इस प्रक्रिया का पालन न करना नियमों का सीधा उल्लंघन है।

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अदालत ने इससे पहले भी यह सवाल उठाया था कि परिजनों की शिकायत के बावजूद स्थानीय स्तर पर एफआईआर दर्ज क्यों नहीं की गई। मजबूरन परिजनों को लखनऊ में जीरो एफआईआर दर्ज करानी पड़ी, लेकिन इस पर भी पुलिस की ओर से संतोषजनक जवाब पेश नहीं किया गया।

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मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर लगातार उठ रहे सवालों के बीच अब निगाहें 2 मई की अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां कोर्ट पुलिस से स्पष्ट और ठोस जवाब की अपेक्षा कर रहा है।

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