नैनीताल की बदहाल सड़कों पर हाईकोर्ट सख्त -7 दिन में मलबा-कचरा हटाने के आदेश
नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने नैनीताल जिले की जर्जर सड़कों और पर्यावरण के साथ हो रहे खिलवाड़ पर कड़ा रुख अपनाया है। अवकाशकालीन न्यायाधीश न्यायमूर्ति आलोक महरा की पीठ ने शुक्रवार को सड़कों के किनारे पड़े निर्माण मलबे और ठोस कचरे को हटाने के लिए प्रशासन को सात दिन की मोहलत दी है।
वर्चुअल माध्यम से हुई सुनवाई के दौरान जिलाधिकारी नैनीताल ललित मोहन रयाल ने न्यायालय को आश्वस्त किया कि सड़कों के गड्ढे भरे जाएंगे, किनारे जमा मलबा हटाया जाएगा और कचरे का विधिवत निस्तारण सुनिश्चित किया जाएगा।
यह निर्देश अनिल यादव द्वारा दायर जनहित याचिका पर दिए गए हैं, जिसमें पर्वतीय मार्गों पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर हो रही अवैध डंपिंग और कचरा प्रबंधन की विफलताओं को उजागर किया गया था। न्यायालय ने इन आरोपों को गंभीर मानते हुए प्रशासनिक लापरवाही पर कड़ी नाराजगी जताई।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता डी.सी.एस. रावत और जय कृष्ण पांडे ने कोर्ट को बताया कि हल्द्वानी-नैनीताल, कालाढूंगी और भवाली-कैंची धाम जैसे व्यस्त मार्गों पर निर्माण मलबा जानबूझकर तीखे मोड़ों और ब्लाइंड टर्न्स पर डाला जा रहा है। इससे न केवल यातायात बाधित हो रहा है, बल्कि मानसून के दौरान फिसलन बढ़ने से दुर्घटनाओं का खतरा भी बना हुआ है। कई स्थानों पर सुरक्षा दीवारें और क्रैश बैरियर तक मौजूद नहीं हैं, जिससे स्थानीय लोगों, स्कूली बच्चों और पर्यटकों की जान जोखिम में है।
याचिका में वनों और पर्यटन स्थलों पर प्लास्टिक कचरा व शराब की बोतलें जलाने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। इसे ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 का खुला उल्लंघन बताते हुए कहा गया कि इससे वन्यजीवों और हिमालयी पारिस्थितिकी को अपूरणीय क्षति पहुंच रही है। याचिका में इसे नागरिकों के अनुच्छेद-21 (जीवन के अधिकार) का हनन करार दिया गया।
हाईकोर्ट ने जिलाधिकारी नैनीताल, नगर पालिका नैनीताल और नगर निगम हल्द्वानी को स्पष्ट निर्देश दिए कि संबंधित राजमार्गों से सारा मलबा और ठोस कचरा तत्काल हटाया जाए। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि जनसुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
न्यायालय के निर्देशों के बाद जिलाधिकारी ने भरोसा दिलाया कि प्रशासन युद्धस्तर पर कार्य करेगा और एक सप्ताह के भीतर सभी चिन्हित मार्गों से निर्माण मलबा हटाकर कूड़े के वैज्ञानिक निस्तारण की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
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संपादक – फास्ट न्यूज़ उत्तराखण्ड
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