बिंदुखत्ता राजस्व गांव की मांग पर ऐतिहासिक महारैली, डीएम को सौंपा ज्ञापन- हजारों की संख्या में जूटे लोग

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लालकुआँ। बिंदुखत्ता को राजस्व गांव का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर आयोजित महारैली ऐतिहासिक जनसैलाब की गवाह बनी। हजारों की संख्या में उमड़ी जनता ने एक स्वर में राजस्व गांव की अधिसूचना जारी करने की मांग को बुलंद किया। रैली के उपरांत प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल को ज्ञापन सौंपकर शीघ्र कार्रवाई की मांग की।


जनसभा को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि बिंदुखत्ता की जनता दशकों से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रही है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है जब सरकार को जनभावनाओं का सम्मान करते हुए तत्काल राजस्व गांव की अधिसूचना जारी करनी चाहिए। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि जनता की आवाज को अब और अनसुना नहीं किया जा सकता।

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नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने सरकार पर निशाना साधते हुए चेतावनी दी कि यदि शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन और व्यापक रूप लेगा। उन्होंने कहा कि बिंदुखत्ता के विकास और अधिकारों की लड़ाई को हर हाल में अंजाम तक पहुंचाया जाएगा।

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वरिष्ठ नेता हरीश दुर्गापाल ने कहा कि राजस्व गांव का दर्जा मिलने से भूमि, पट्टों और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं का स्थायी समाधान संभव होगा। उन्होंने इसे केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि सामाजिक न्याय से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बताया।


आंदोलन के प्रमुख चेहरा बहादुर सिंह जंगी ने स्पष्ट कहा कि जब तक राजस्व गांव की अधिसूचना जारी नहीं होती, तब तक संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है।


ज्ञापन लेते हुए जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने आश्वस्त किया कि जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए ज्ञापन को तत्काल शासन को भेजा जाएगा तथा शासन से प्राप्त निर्देशों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

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महारैली के दौरान पूरे क्षेत्र में जोश और अनुशासन का अनूठा संगम देखने को मिला। प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा और कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। बिंदुखत्ता की इस ऐतिहासिक महारैली के बाद अब क्षेत्र की जनता की निगाहें सरकार के फैसले पर टिकी हुई हैं।

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